कोरोना से जुडी पोसेटिव खबर

March 26, 2020

                                                                               


 कोरोना से जुडी पोसेटिव खबर 

यह सच है की आज दुनिया में हर कोई कोरोना के डर से घबराया हुआ है  | परन्तु यह भी उतना ही सत्य है कि  कोरोना से डरने और घबराने से काम नहीं चलेगा |बल्कि काम चलेगा सावधानी बरतने से,सावधानी बरतने के जो तरीके बताये जा रहे है उन्हें अपनाने से | साथ ही माननीय प्रधान मंत्री जी के लोकडाउन का समर्थन करने से  |  

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  यह जानकर शायद आपको आश्चर्य होगा  की जो बाते सालो से हमारे भविष्य वक्ता कहते आ रहे है, हमारे  बुजुर्ग कहते आ रहे है, सामाजिक संस्थाए कहती आ रही है, रचनात्मक कार्य करने वाले लोग,साहित्यकार ,कवि, लेखक, सिनेमा या किताबो के माध्यम से हमें अवगत कराते आ रहे है | हमारे वेद-पुराण,गीता -रामायण, बाइबल, कुरआन, गुरुग्रंथ यानी सभी धार्मिक पुस्तके | हमारे महापुरुष स्वामी विवेकानंद,महावीर स्वामी,गौतम बुद्ध,महात्मा गाँधी | इन सभी ने हमें प्रकृति और पर्यावरण से जुड़ने की बात कही | लेकिन हमने हमेशा उसे बहुत हल्के में लिया | हमारे वैज्ञानिकों ने नए- नए आविष्कार हमारी सुख सुविधाओं के लिए किये | हमारी आवश्यकताओ ,जरूरतों के लिए किये  | लेकिन हमने उनका यूज नहीं बल्कि मिस यूज किया | प्रकृति ने भी हमे समय- समय पर बाढ़,सूखा,भूकंप,सुनामी  जैसी  आपदाओं से हमारी गलतियों  को अवगत कराने का भरसक प्रयास किया | लेकिन हम तो  मनुष्य है हम ने भी कसम खा  रखी है |


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 पानी की समस्या हो,चाहे बिजली की या तो हम  इनका ठीकरा सरकारों पर फोड़ते आये है | या हम नए -नए आविष्कार खोज कर समाधान निकालने में विश्वाश करते रहे | परन्तु  महंगे आविष्कारों के सपनो को साकार करने में हम प्रकृति और  प्राकृतिक नुस्खों की अनदेखी करते गए  |  हम हमारी गलतियों को सुधारने के बजाय  अपनी वाह वाही लूटने के लिए यह भी भूल गए की हम से ऊपर भी कोई है | जो इस सृष्टि को चला रहा है | हम अपने स्वार्थ में इतने लीन हो गए की  नैतिकता,इंसानियत जैसी बातो को हमने अपनी डिक्शनरी से ही निकाल दिया | पैसा हमारे लिए इतना महत्वपूर्ण हो गया की पैसा कमाने और उसे बहाने  के लिए हम कुछ भी करने को तैयार हो गए  | ना हमे हमारे स्वास्थ्य से मतलब रहा ना रिश्ते नातो से  | सुबह से शाम तक रात दिन हम पैसा कमाने के लिए दौड़ते रहे | सिर्फ पैसे को ही ढूंढते  रहे | कहाँ है पैसा  ? कहाँ  मिलेगा पैसा ? हम तो इतने स्वार्थी  हो गए की प्रकृति के चक्र को तोड़ कर पैसो के पेड़ तक उगाने के लिए  रासायनिक परिवर्तन के माध्यम से फल फूल और सब्जियों तक की नई- नई तकनीक ईजाद कर ली | 


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अरे  धिक्कार तो हमे यह धरती  इस बात के लिये भी रही है कि  जिस मिट्टी से हम घरों  के चूले चौके  साफ किया करते थे,घरों में  जिस मिट्टी  की खुशबु से ही भोजन का प्राकृतिक स्वाद बढ़ जाया करता था | उसे भी हमने बिलकुल ही नकार दिया | थोड़ी सी दूर के लिए भी पैदल चलने का रिवाज हम खत्म कर ही चुके है | बच्चे  की भले ही उम्र ना हो परन्तु मोटर साइकिल क्या फॉर व्हीलर को भी सड़क पर फुल स्पीड से दौड़ते हुए हम  फ़क्र  महसूस करते है  |   दूसरे के बच्चे को हम  भले ही  नसीहत देदें  गलत  साबित कर दे  परन्तु हमारे अपने बच्चे की  तो हम स्टंट की वीडियो बना कर भी फेस बुक पर अप  लोड  कर सकते है  | और लाइक के लिए भी कह सकते है | बाते ना जाने कितनी है जिसके लिए सरकार भी समय समय पर हमे जागरूक करती रहती है |  परन्तु  जागरूक न होने की  तो शायद हमने कसम ही खा ली है | जागरूकता के दायरे में हम नहीं बल्कि हमारे पड़ोसी  आते है |  हर कोई यही सोचे बैठा है कि हम तो जागरूक है , हम तो समझदार है ,  हम कुछ गलत करते ही  नहीं है |    दोष तो सब दूसरो के ही होते है | 

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परन्तु यह कोरोना वाइरस से बचाव की अपील सिर्फ मोदी जी की ही नहीं है | इसलिए इसे हल्के में ना ले |  यह  सिर्फ आपकी ही नहीं  बल्कि करोड़ो लोगों  की जिंदगी का सवाल है |  ये अपील सिर्फ मोदी जी की ही नहीं  ये अपील तो प्रकृति की भी है  |  जो शायद यह चाहती है की यदि कुछ समय सड़के खाली रहे तो सड़को का बोझ कम हो,उन्हें भी कमर सीधी करने का मौका मिले |  सड़को पर वाहन नहीं चलने से हो सकता है वायु  प्रदूषण कुछ कम हो,कारखानों के कुछ दिन बंद रहने से  वायु प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण , जल प्रदूषण कम हो सके   |  वहीं  काम  के बोझ  तले  दबे व्यक्ति को रिलीफ मिल सके  रात दिन की भाग दौड़ से जिन्हे एक मिनट  का समय नहीं मिल पा रहा था इस बहाने वो भी कुछ रेस्ट कर सके |   हो  सकता है  इस से आर्थिक  रूप से हम पिछड़ जाए , लोगों  को आर्थिक समस्याओँ  का सामना करना पड़  जाए  |  परन्तु यह भी सच्चाई है की यदि इंसान स्वस्थ रहेगा तो वह आर्थिक परेशानी के हल निकाल लेगा  और अस्वस्थ रहेगा तो आर्थिक,मानसिक ,शारीरिक तीनो परेशानियों को जीवन कुर्बान करके भी दूर नहीं कर पायेगा  | 


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 इसलिए देश हित में माननीय   प्रधानमंत्री  श्री नरेंद्र  मोदी  जी की अपील का पालन अवश्य करे  |  और प्रकृति के इशारों  को भी समझे उसका पालन  करने की कोशिश  करे |  एक नागरिक होने के नाते  धर्म,जाति  को भूल कर राष्ट्रीयता की भावना से ,ऐसे समय में  इंसानियत, नैतिकता , ईमानदारी दिखाकर एक नागरिक होने का फर्ज अवश्य अदा करे  | शायद  कोरोना जैसी  महामारी  से  लड़ने  में यही सहयोग महत्वपूर्ण  साबित होगा  | 



                                                                                                                       कोरोना 

                              को     -      कोना  कोना 


                               रो.     -          रोकना 


                             ना        -       ना समझों  को टोकना 
                                                                        

                                            -   by jeevan amrat

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