क्या आधुनिक समय में पैसा मनुष्य का सबसे बड़ा दुश्मन बन गया है ?

क्या आधुनिक समय में पैसा मनुष्य का सबसे बड़ा दुश्मन बन गया है ?

आधुनिक समय में पैसा मनुष्य का सबसे बड़ा दुश्मन बन गया है |  पैसा होना और   ना  होना दोनों  ही  दुश्मनी की वजह है | अधिकतर  अमीर  इंसान गरीब को अपना दुश्मन समझते  है |  वहीं  कई बार  गरीब इन्सान  भी बेवजह ही अमीरों  को अपना दुश्मन समझने  लगता है  |  चाहे हकीकत कुछ  भी हो  लेकिन यह कटु सत्य है  | पैसा कमाने के चक्कर में इंसान अपने रिश्ते नातों  को भूल जाता है  | और उनसे दुश्मनी मोल ले लेता है |   अपने थोड़े से   लालच के लिए वह इंसानियत तक को ताक  पर रख देता है  |  दुनिया भर  का तनाव और दुश्मनी लेकर भी इंसान पैसा कमाने की दौड़ में  सबसे आगे खड़ा होना  चाहता है |  ताज्जुब जब  होता  है  जब एक सुशिक्षित, प्रतिष्ठित , ईमानदार इंसान भी पैसा कमाने के  लिए कानूनों को तोड़ने मरोड़ने का प्रयास करने से नहीं चुकता है | आज बड़े- बड़े रईस  खानदानों  भी पैसों तथा  प्रॉपर्टी की लड़ाइयाँ  सामने आने लगी है और इसके लिए जान लेने और देने तक की नौबत से भी इंकार  नहीं किया जा    सकता  |  जिसके पास पैसा  है  वो उस पैसे को बचाने  की  वजह से जान जोखिम  में  डाले हुए है  |  जिसके पास नहीं है वह अपनी भूख मिटाने के लिए  अपनी आर्थिक स्थिति सुदृढ़  करने के लिए उलटे सीधे तरीके  अपनाने से भी नहीं चूकते है |   ना जाने  कितने लोग उस  बेचारे के दुश्मन बने हुए है  |
https://images.app.goo.gl/xHx9eu8VoGoLNacb7


 पैसा  नहीं होने और पैसा होने  दोनों ही वजह से इंसान अपने आप का भी दुश्मन बना हुआ है |    क्योँकि  दोनों ही वजह से  तनाव लेकर वह  अपने स्वास्थ को बिगाड़  रहा  है |  इस पैसे की ही देन  है की आदमी अपने दुःख से इतना दुखी  नहीं है जितना  दूसरों  को सुखी देख कर  |   पैसा कमाने की अंधी दौड़ में  लोग अपने  बिजनेस  में प्रतिस्पर्धा  से जूझ रहे होते है |  ना जाने कितने लोग इस प्रतिस्पर्धा के   चलते एक दूसरे के दुश्मन बन जाते है |  पैसा  ही किसी की सही बात को गलत साबित  करवा  सकता सही को गलत  बाप बड़ा ना  भैया |  सबसे बड़ा रुपैया की सोच  इंसानियत, ईमानदारी, सच्चाई , अहिंसा  तक  पर भारी पड़ी हुई है | जिसका फायदा मुठ्ठी भर लोगों  को मिल पाता  बाकी तो पैसा होने और ना  होने के जुर्म में या तो अदालतों  के  चक्कर काटते काटते अपनी जिंदगी गुजार देते है | या अपने जीवन की खुशियों  को दांव पर लगा कर  जीवन भर दुश्मनियाँ  मोल लेते रहते है | जरा सोच कर देखें  कितने लोग हैं जो पैसा होने के बावजूद अपने जीवन को सुख शांति और सुकून से जी पाते है |  रातों  की नींद और दिन का चेन खोकर पैसा तो कमा लेते है लेकिन उस पैसे के बिस्तर पर चेन की नींद कभी नहीं सो सकते |
https://images.app.goo.gl/1jm2J5fUF6HKMKvf9

  चेन  सुकून की नींद तो पैसा कमाने के बाद वो इंसान सो सकता है  जो उस पैसे का सदुपयोग  करना जनता है जिसके दिल में पैसे   वाला होने के बावजूद इंसानियत ज़िंदा है  जो अपने परिवार के साथ साथ अपने पड़ोसियों के बारे में भी सोचता है | जो समजवाद का सिर्फ नारा ही नहीं देता बल्कि समाजिक  भी है |  अमीरो के साथ साथ गरीबों  को भी अपनी जिम्मेदारी  से  अवगत कराना चाहूंगा |  पैसा भले ही उनके   पास ना हो लेकिन जिस व्यक्ति को भगवान ने इंसान के रूप में जन्म दिया है उसे हाथ पैर  देकर इस संसार में भेजा  है |  अरे हाथ पैर  मारने से तो इंसान तैरना भी सिख जाता है | तो  ईमानदारी और नेक नियति से हाथ पैर  मारकर तो देखो  जीवन जीने लायक तो इंसान कमा ही सकता  है | क्यों फिर आर्थिक स्थिति  रोना रो  रोकर   अपने आप को गरीबी की लाइन में खड़ा किये हुए हो |  सबसे बड़ा गरीब तो वह  है जिसने पैसा कमाने के लिए अपने हजारों  दुश्मन पैदा  कर  लिए है  |  जिसे रात  दिन कभी इन्कम टेक्स वालों  का डर  रहता है तो  कभी असामाजिक तत्वों का जिनके पास उसकी काली करतूतों के प्रमाण है |  समझने  कोशिश करें  में पैसा कमाने  या अमीर  बनने के खिलाफ भी  नहीं हूँ  |  परन्तु हमे इतना तो   ध्यान रखना  ही चाहिए कि  पैसा बहुत कुछ हो सकता है परन्तु सब कुछ नहीं |
https://images.app.goo.gl/higdAZdoDsBHF5vi7


यदि आपको भी लगता है आधुनिक समय में दुश्मनी का सबसे बड़ा कारण पैसा ही है तो हमे कमेंट अवश्य करें यदि आप हमारी बात से असहमत है तो भी कमेंट करके कारण बताये  | 

No comments:

यदि आपको हमारा लेख पसन्द आया हो तो like करें और अपने सुझाव लिखें और अनर्गल comment न करें।
यदि आप सामाजिक विषयों पर कोई लेख चाहते हैं तो हमें जरुर बतायें।

'; (function() { var dsq = document.createElement('script'); dsq.type = 'text/javascript'; dsq.async = true; dsq.src = '//' + disqus_shortname + '.disqus.com/embed.js'; (document.getElementsByTagName('head')[0] || document.getElementsByTagName('body')[0]).appendChild(dsq); })();
Powered by Blogger.