आजादी का सही अर्थ है अपने आप को बंधनो से मुक्त करना

December 09, 2019
   73  वां स्वतंत्रता दिवस हम मना चुके है  परन्तु आज भी हम आजादी का अर्थ नहीं समझ पा  रहे है | अंग्रेजो की गुलामी से हम आजाद हो चुके है |  परन्तु हमारी सोच की गुलामी से आज भी हम स्वतंत्र नहीं है जब तक हम अपनी सोच की गुलामी से आजाद नहीं होंगे |   अंग्रेजो से मिली आजादी का असली मजा नहीं ले पाएंगे अंग्रेजो की जिस सोच की वजह से हम उनके गुलाम बने रहे आज वही  फूट  डालो राज करो की नीति   हम हमारे परिवारों और  समाज में देख रहे है |  अंग्रेजो की बेड़ियों से तो हम आजद हो गए परन्तु सामाजिक बेड़ियों से स्वतंत्रता की  दरकार  आज भी महसूस की जा रही है | 
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 आधुनिक युग में हर कोई स्वतंत्र होकर जीवन जीना चाहता है |  परन्तु स्वतंत्रता का अर्थ समझना नहीं चाहता आजादी का सही अर्थ है अपने आप को बंधनो से मुक्त करना |  जब बंधन खुलते हैं तो हम रिलीफ महसूस करते हैं जब हम रिलीफ महसूस करते हैं तो स्वतः ही हमारा चेहरा खुशियों से चमक उठता है स्वतंत्रता का सही अर्थ वास्तव में बंधन मुक्त होकर खुशहाल जीवन जीना है |

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 परन्तु आज की युवा पीढ़ी जोश में होश खोकर  उच्छृंखलता  को आज़ादी  मान रही  हैं |  आज के युवा अपने  मन के काम में बाधा न आने  की आजदी  चाहते हैं |   चाहे वो सही हो या गलत उसमे पाबंदी  उन्हें   पसंद नहीं इसी पाबन्दी की वजह से अधिकतर परिवारों में बुजुर्गो तथा युवाओं  का तालमेल बिगड़ा हुआ  है  | कही  बुजुर्गों  के बे बुनियादी  आदर्श  और सिद्दांत  इस स्वतंत्रता में बाधा  बने हुए है |  कही  युवाओं की उच्छृंखलता |  आजदी,  स्वतंत्रता चाहना  कोई बुरी बात नहीं है  परन्तु   आर्थिक, सामाजिक और शारीरिक पहलुओं पर विचार किये बिना सिद्धांतों और कानूनों से आज़ादी पाना वास्तव में आज़ादी नहीं है  |
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 अत्याचारों और गुनाहों की  गुलमी से मुक्त होने के लिए स्वतंत्रता चाहना जायज है परन्तु पारिवारिक और सामाजिक प्रतिष्ठा को दाव पर लगाकर शौक, मौज, मस्ती के लिए पारिवारिक  संघर्ष  स्वतंत्रता की लड़ाई  नहीं है |  आज परिवारों में जो स्वतंत्रता की लड़ाई छिड़ी हुई है मुख्य रूप से वो मौज, शौक, मस्ती की आज़ादी है जो उस  हद तक तो जायज कही जा सकती है जहाँ तक परिवारों  में खुशियों प्रसन्नता का माहौल बना रहे लेकिन यही आज़ादी अगर परिवार की खुशियों में ग्रहण लगा दे तो उससे वो गुलामी बढ़िया है जिसमे पारिवारिक की  एकता और प्यार मोहब्बत बना हो |

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  इसके लिए जहां तक आवश्यक हो हम सभी को चाहे वो युवा वर्ग हो या बड़े बुजुर्ग चाहे स्त्री हो या पुरुष अपनी अपनी सोच में कुछ तो परिवर्तन लाना ही होगा |  क्योंकि  बिना परिवार और समाज के आजादी तो उस खौफनाक  जंगल की तरह हो जाएगी जहाँ  जंगली जानवरों  के भय  से कोई जाना ही पसंद नहीं करता |  आजादी  का यदि वास्तव में आनंद लेना चाहते है तो परिवार और समाज की खुशहाली का ध्यान रखे  |



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