परिस्थितियों से मुकाबला करने के लिए हमें लोगों से लड़ने की ज़रुरत नहीं होती

December 27, 2019
अक्सर लोग हर परिस्थिति का अपने पक्ष में होने का इंतज़ार करते हैं | इसी इंतज़ार में जीवन बिना जीए ही गुज़ार देतें हैं | हर समाधान जैसा हम चाहतें हैं वैसा नहीं हो सकता | इच्छाएं हमारी अनंत होती है हर इच्छा पूर्ण नहीं हो सकती | सपने हम बहुत देखतें हैं हर सपना पूर्ण नहीं हो सकता यदि हम हर चीज़ अपने अनुसार चाहतें हैं तो इंतज़ार करना आवश्यक है |

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और इंतज़ार करने के लिए धैर्य रखना आवश्यक है | समस्या यह होती है कि हम इंतज़ार तो करना चाहतें हैं लेकिन बिना धैर्य के | धैर्य रखकर परिस्थितियों को अपने पक्ष में बनाने से एक न एक दिन इंतज़ार अवश्य ख़त्म हो सकता है | परिस्थितियों को अपने पक्ष में बनाने के लिए प्रयास करना आवश्यक होता है | हम गलती यह करतें हैं की परिस्थिति को पक्ष में बनने का भी इंतज़ार करतें हैं |जबकि परिस्थिति को पक्ष में बनाने का प्रयास हमें करना चाहिए वह हम करतें नहीं हैं |

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कैसे करें परिस्थितियों को पक्ष में
सोच का परिस्थितियों के पक्ष में होने और न होने में महत्वपूर्ण योगदान होता है | सिर्फ हमारी सकारात्मक  सोच से हम परिस्थितियों को पक्ष में कर सकतें हैं | हम सोच को नकारात्मक रखकर परिस्थितियां कभी नहीं बदल सकते | गलतियों को सुधारकर हम परिस्थितियों को पक्ष में कर सकतें हैं |जो लोग गलतियाँ मानने को ही तैयार नहीं होतें हैं वो उनमे सुधार नहीं कर सकते | परिस्थितियों को पक्ष में करने का सबसे आसान तरीका है की हम न तो  परिस्थितियों से लडे न हीं लोगों  से  बल्कि उनका स्वागत हँसकर मुस्कुराकर स्वस्थ मन से मुकाबला करके करें परिस्थितियां खुदबखुद हँसती हुई बदल जाएंगी |

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परिस्थितियों से मुकाबला करने के लिए हमें लोगों से लड़ने की ज़रुरत नहीं होती | गलती हम यही करतें हैं मुकाबला हम परिस्थितियों से करने निकलते हैं और लड़ाई लोगों से करने लगतें हैं | जो लोग परिस्थितियों से मुकाबला करतें हैं वो जीवन को पूरा जीते हैं और ऐसे लोगों को दुनिया हमेशा याद करती है | और जो लोग परिस्थतियों की जगह लोगों से लड़ने में अपना जीवन गुज़ाए देतें हैं वो न खुद जी पाते हैं न दूसरों को जीने देतें हैं | ऐसे लोग अपने जीवन के किसी भी पल को नहीं जी पाते हैं न परिस्थितियों को बदल पाते हैं न खुद बदल पाते हैं |

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