दोष जमाने का नहीं हमारा भी है क्योंकि ज़माने में हम सभी हैं

December 10, 2019
दुनिया का पहला सबसे आसान काम है बिना माँगे  सलाह देना  | दूसरा आसान काम किसी में भी तुरंत कमी निकाल देना |  पहला सबसे मुश्किल काम किसी की सलाह पर अमल करना |  दूसरा सबसे मुश्किल काम अपनी गलती को पहचानकर उसे स्वीकारना |  आज यदि दुनिया में समाज में  परिवार में यदि असमंज, विवाद ,कटुता, दुःख दर्द बढे हैं तो उनके मुख्य कारण  हैं आसानी से सलाह दे देना और अपनी कमी का हमे पता ही नहीं  चल पाना  दूसरे में हजार निकल देंना  | गलत किया तो उसने सही किया तो मैंने | 

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सलाह   ऐसे देते हैं जैसे कुछ  करना ही न पड़े  ये तो बहुत सिंपल है , इतनी सी बात पहले क्या नहीं बताया ?  बता दो तो बताया ही क्यों  ? कोई काम कर दो तो  ऐसा  क्यों   किया ? नहीं करो तो अभी तक किया क्यों नहीं ? स्पष्ट बोल दो तो स्पष्ट क्यों बोला ? नहीं बोलो तो स्पष्ट क्यों नहीं बोला ? इन्ही असमंजस  की वजह से लोग कंफ्यूज हो चुके हैं दुखी हो कर  सलाह लेने और  देने में डरने  लगे हैं |  स्पष्ट बोलने और न बोलने से  चुप रहना ज़्यादा अच्छा समझने लगे है  जो वास्तव में सामाजिक रूप से अच्छा नहीं है | 

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 इन्ही  बातों के चलते कौन मुसीबत मोल ले ?  हर जगह सुनने  को मिल सकता है और यही  वजह है जिन्हे मदद की ज़रुरत होती है उन तक मदद नहीं पहुँच पाती  | जिन्हे सलाह की ज़रुरत होती है उन्हें सलह नहीं मिल  पाती  | आपकी कमियां आप तक नहीं  पहुँच पाती पहुँच भी जाती है तो बताने वाला ही दुश्मन नज़र आने लगता है | 


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तर्क संगत  बातों का भी वजन कम होने लगा  |  आज हम किसी भी बात के लिए ज़माने को दोष देने  लगे हैं  | दोष जमाने का नहीं  हमारा भी है  क्योंकि ज़माने में हम सभी हैं |  दोष है हमारी कार्यशैली का, हमारे तौर तरीकों का, हमारे भ्रम, का एक दूसरे के मन को नहीं छू  पाने  का, परिस्थितियों को नहीं समझ पाने का, अपने अपने स्वार्थ  की पूर्ती हर बात में हर काम में नफे नुकसान का आंकलन करने का | 

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