श्री राम ने ये लड़ाई स्वाभिमान से लड़ी थी दबंगाई से नहीं

October 08, 2019

 यह बात  जानते सब है परन्तु अमल में कम लोग ला पाते है

विजय दशमी को हम सम्पूर्ण भारत वर्ष में विजय पर्व के रूप में मनाते आये है | हर  घर परिवार  में इस दिन हर्षोल्लास का माहौल  होता है |  इस पर्व को मनाने के पीछे हम सिर्फ इतना ही जानते  है कि  इस दिन भगवान श्री राम रावण को मार कर अयोध्या लोटे थे |  इसी विजय की ख़ुशी मनाने में अयोध्या वासियो ने इस त्यौहार को विजय पर्व के रूप में मनाया था  | और इसी लिए हम भी इस  ख़ुशी को  विजय दशमी के रूप में  मनाते है |  इसके आगे न तो हम सोच पाते है ना अमल  कर पाते है |  इस पर्व को  भगवान राम की रावण  पर विजय के रूप में मनाते जरूर   है  परन्तु यह पर्व  बुराई पर अच्छाई  की जीत  का संदेश भी देता है |  यह बात  जानते सब है परन्तु अमल  में  कम  लोग ला पाते है |


https://images.app.goo.gl/zMJ7pWY4oU8eN39C9


    ना ही पवन पुत्र हनुमान श्री राम के भक्त बन पाते

हम सिर्फ लड़ाई झगड़े लड़ कर उसकी  जीत की ख़ुशी मनाना  चाहते है  |  लड़ाई  को भी ,आधुनिक हथियारों से लेस हो कर लड़ना  चाहता है |  अपनी दबंगाई  दिखाना चाहता है जबकि भगवान श्री राम   ने ये लड़ाई स्वाभिमान से लड़ी थी  दबंगाई से नहीं |  इसी वजह से इस विजय में अनेको  वानरों के  आलावा  कई लोगों  ने निस्वार्थ उनका  साथ दिया था वरना  शायद रावण  के घमंड को तोड़ पाना इतना आसान नहीं होता |   ना ही  पवन पुत्र हनुमान श्री राम के भक्त बन पाते |  इससे यह साफ़ जाहिर है की किसी को भी अपना भक्त बनाने के लिए छल, कपट और दबंगाई  काम नहीं करती |  बल्कि शालीनता, विनम्रता,  सच्चाई ,ईमानदारी, हौसला, सदभावना  जैसे गुणों से  प्रभावित होकर ही कोई आपके दुखो में साथ देने के लिए जी जान लगा सकता है |

https://images.app.goo.gl/qv6ahyNNtdHDbWm79
 अपने अवगुणो को जितने से बड़ी विजय कोई नहीं हो सकती


 आज हम घर  परिवार में भी युद्ध  सा माहौल देख रहे है |हर कोई  लड़ाई झगड़े की स्थिति में पवन पुत्र जैसा हितेषी चाहता  है  |  शालीनता, विनम्रता, सच्चाई ,सदभावना  के बिना ऐसा हितेषी मिलना बहुत ही मुश्किल है  | आज लोग प्रभाव का दिखावा करना चाहते है  |  जबकि युद्द करके विजय प्राप्त करना एक अलग मुद्दा है  |  जीत  सिर्फ इसी को नहीं कहा  जाता है की आप बाहुबल दिखा कर दुनिया में या  घरो में राज करो |  दिलो को जितना भी बहुत बड़ी विजय होती है |   अपने अवगुणो को जितने से बड़ी विजय कोई नहीं हो सकती |  अपनी कमियों को स्वीकार कर उनमे सुधार कर लेना भी   बड़ी जीत है |  दुश्मनी को दोस्ती में बदलना एक विजेता की बहुत बड़ी कला होती  है |
https://images.app.goo.gl/nMzeqXXgJZkyqsZX6


  घमंड और अभिमान से हमेशा  दूर रहे 

आज के आधुनिक युग में तो इंसान की सबसे बड़ी विजय तब होती है जब उसके परिवार के लोग सुख शांति और खुशहाली पूर्ण जीवन जी रहे हो |  जिसके लिए हर कोई प्रयासरत रहता है, पूजा पाठ करता है, भगवान  से सुख शांति की प्रार्थना भी करता  है |  परन्तु विडंबना यह होती है की उसकी वजह से कहाँ  घर में अशान्ति  बनी हुई है ? क्या नुकसान हो रहे है ? उसकी नफरत ,कुंठा परिवार की हार का कारण तो नहीं  बन रही  है ? इन बातो पर किसी का ध्यान ही नहीं जा पाता  |  जब हम इन बातो पर  विचार करेंगे  तो भगवान हमारी सुख समृद्धि की प्रार्थना को स्वतः ही स्वीकार कर लेगें |  इसलिए  इस बार इस विजय पर्व को सिर्फ इस ख़ुशी में नहीं मनाये की भगवान राम रावण को मारकर अयोध्या लोटे थे |  बल्कि विजय दशमी मनाने के मुख्य उद्देश्य अपनी बुराइयों, कमियों, गलतियों को स्वीकार कर  उन्हें दूर करने का प्रयास करे |  घमंड और अभिमान से हमेशा  दूर रहे  |  क्योकि रावण को  विद्वान् पंडित होते हुए भी अहंकार और घमंड ने  मोत के मुहं में पहुंचा दिया था  ?  लड़ाई हमेशा स्वाभिमान से लड़े   दबंगाई से नहीं | 


https://images.app.goo.gl/hcJtNcP2xEG5yFP37
लेख आपको कैसा लगा अपने अमूल्य सुझाव हमे अवश्य दे आर्टिकल यदि पसंद आया हो तो like , share,follow करें | 


No comments:

यदि आपको हमारा लेख पसन्द आया हो तो like करें और अपने सुझाव लिखें और अनर्गल comment न करें।
यदि आप सामाजिक विषयों पर कोई लेख चाहते हैं तो हमें जरुर बतायें।

'; (function() { var dsq = document.createElement('script'); dsq.type = 'text/javascript'; dsq.async = true; dsq.src = '//' + disqus_shortname + '.disqus.com/embed.js'; (document.getElementsByTagName('head')[0] || document.getElementsByTagName('body')[0]).appendChild(dsq); })();
Powered by Blogger.