2अक्टूबर के दिन खिले थे ये दो फूल सादा जीवन अमन चेन के थे पुजारी

October 02, 2019
2अक्टूबर के दिन खिले थे ये दो फूल सादा जीवन अमन चेन के थे पुजारी

महात्मा गाँधी को सत्य अहिंसा का पुजारी कहा  जाता है  वही लाल बहादुर शास्त्री को उनकी सादगी के लिए पहचाना जाता है | दोनों के अपने अपने सिध्दांत थे दोनों में कुछ समानताये भी थी | 


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 पहली तो यह की दोनों का जन्म 2  अक्टूबर के दिन हुआ था |

 दूसरा यह की दोनों देश के ही नहीं बल्कि विश्व समुदाय के प्रेरणा स्त्रोत रहे है |

 तीसरा यह की दोनों ने सादा  जीवन उच्च विचार को अपनी जीवन शैली बनाया |

चौथा दोनों ने अमन  चैन की बात कही  |

पांचवा दोनों ने सत्य अहिंसा को जीवन का मार्ग बताया |

छठा दोनों ने जाती धर्म स्वे ऊपर उठकर जीवन जीने को महत्व दिया |

सातवाँ  दोनों ने फिजूल खर्ची को जीवन की बर्बादी बताया |


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आठवां दोनों ने समय की पाबंदी और प्रबंधन पर जोर दिया |

 नौवां दोनों ने व्यवहार को विनम्र रखने गुस्सा  न करने का संदेश दिया  |

दसवां दोनों ने कर्म की प्रधानता पर बल दिया |

यह सच है की हम जीवन को इन महापुरुषों की तरह नहीं जी सकते |  हर कोई महापुरुष बन भी नहीं सकता  |  क्योकि महापुरुष बनने की राह  आसान भी नहीं है |  परन्तु इन सच्चाइओ में से कुछ पर भी हम अमल  कर ले  और दुनिया को नहीं बल्कि अपने परिवार कुछ सदस्यों के भी प्रेरणा स्त्रोत बन सके तो महापुरुष भले ही नहीं बने एक कर्म प्रधान पुरुष आप अवश्य बन सकते है  | अपने परिवार में तो अमन  चेन ला ही सकते है | आपका यह छोटा सा प्रयास दुनिया में अमन चेन लाने का मार्ग प्रशस्त करेगा  | आज भले ही हम इक्कीस वीं  सदी में जी रहे है | अमन  चेन की बड़ी बड़ी बाते  करते जरूर है परन्तु दिल पर हाथ रख कर सोचे |  अपने परिवार का अमन  चेन कायम करने में हम कितना सहयोग दे पाते है | 


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कही  सास- बहु  के झगड़े, कहीं भाई -भाई की दुश्मनी ,कहीं  पति - पत्नी के विवाद, आज कल तो माँ बाप और बच्चों  तक में अमन चेन नहीं है |  और इसके लिए जिम्मेदार सिर्फ हम ही  है |  ना हम सत्य अहिंसा का महत्व समझ रहे है ना सादा जीवन उच्च विचार का |  हम अर्थ समझ रहे है सिर्फ  धन दौलत  और सुख सुविधाओं का  |   जिसने इनके आभाव को स्वीकार कर जीवन को जीना सीख लिया  वहां सत्य अहिंसा भी दिखेगी अमन  चेन भी दिखेगा, सादा  जीवन उच्च विचार स्वतः नजर आने लगेगा  |  किन्तु  जो अभाव को स्वीकार किये बिना मंहत्वाकांक्षा पाल कर रखेगा  वहां कभी भी सत्य अहिंसा और अमन  चेन नहीं होगा  |

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