प्राकृतिक सिद्धांत प्रकृति प्रदत्त होते हैं कृत्रिम सिद्धांत मनुष्य खुद बनाता है

September 09, 2019

   सिद्धांतों की यदि बात की जाए तो सिद्धांत पर चलना आज के युग में कठिन हो गया है |  हर कोई अपने  बनाए हुए सिद्धांतों  पर चलना चाहता है और  एक दूसरे पर थोपना चाहता है |    वजह यही है की कोई उन्हें मानता है कोई नहीं  मानता |    इस हिसाब से यदि देखा जाए तो सिद्धांत  दो तरह के होते हैं |  एक प्राकृतिक दूसरे कृत्रिम  प्राकृतिक  सिद्धांत  प्रकृति प्रदत्त   होते हैं कृत्रिम सिद्धांत मनुष्य खुद बनाता है |  प्रकृति के सिद्दांतों में लचीलापन  होता है उन्हें बनाने की आवश्यकता नहीं पड़ती उन्हें समझने की आवश्यकता पड़ती है  | प्रकृति के सिद्धांत बड़े  आसान होते हैं लेकिन हम इन्हे तोड़ मरोड़कर आवश्यकता पड़ेंने  पर कृत्रिम बना देते हैं |


https://images.app.goo.gl/CUBDcTF9ASp3enhg6


 प्राकृतिक सिद्धांतों की जब हम पालना नहीं करते हैं तो उनकी पालना करवाने के लिए कृत्रिम सिद्धांतों का प्रतिपादन किया जाता है |  जो नियमो और कानूनों के रूप में होते हैं और जब नियमो और कानूनों  को  सख्ती से लागू किया जाता है तो वो हमे थोपे गए लगने लगते हैं  |  इसलिए हमे  प्रकृति के नियमों को समझना और पालन  करना आना चाहिए |  क्योंकि ये  किसी कानून की  किताब में नहीं  मिलेंगे ये तो हमारे मन की किताब में स्वतः ही बनते हैं और देश काल परिस्थितियों के अनुसार इनमे परिवर्तन हमे स्वयं को ही कारन पड़ता है | प्रकृति   मन के सिद्धांत
https://images.app.goo.gl/gufkPLw3nPSes6Ga6

 यदि हम इनमे परिवर्तन नहीं कर पाते तो वक्त आने पर प्रकृति खुद घटनाओं  दुर्घटनाओं के माध्यम से परिवर्तन करवाने में सक्षम है |  इसलिए कहा जाता है आवश्यकता आविष्कार की जननी है और परिवर्तन प्राकृतिक नियम है  इसलिए  बात चाहे देश की करे, समाज की करे, घर गृहस्थी  की करें ,स्त्री पुरुष  की करें, बच्चे और बड़ों की करे कुदरत के बनाये कानूनों की अवहेलना न करे |   अवहेलना  करने पर कठोर कानून बनाये जाते है  जिनका पालन करने और करवाने के लिए आर्थिक मार झेलनी पड़ती  है, शारीरिक  पिड़ाएँ झेलनी पड़ती है,  मानसिक तनाव झेलना पड़ता है |   जो परिवार की तबाही का कारण बनते हैं |  ईर्ष्या, द्वेष, शत्रुता पनपने का मुख्य कारण प्रकृति के नियमों का  पालन नहीं करना ही  है |


https://images.app.goo.gl/Ex32ivyGcPSpdwK87

लेख आपको कैसा लगा अपने अमूल्य सुझाव हमे अवश्य दे आर्टिकल यदि पसंद आया हो तो like , share,follow करें | 

No comments:

यदि आपको हमारा लेख पसन्द आया हो तो like करें और अपने सुझाव लिखें और अनर्गल comment न करें।
यदि आप सामाजिक विषयों पर कोई लेख चाहते हैं तो हमें जरुर बतायें।

'; (function() { var dsq = document.createElement('script'); dsq.type = 'text/javascript'; dsq.async = true; dsq.src = '//' + disqus_shortname + '.disqus.com/embed.js'; (document.getElementsByTagName('head')[0] || document.getElementsByTagName('body')[0]).appendChild(dsq); })();
Powered by Blogger.