हमारे फैसले बहती हुई नदी की तरह स्वच्छ और शीतल होने चाहिये

September 05, 2019
मैं  इस फैसले से खुश नहीं हूँ, उसने यह गलत फैसला लिया है  , कोर्ट   ने फैसला मेरे पक्ष में नहीं किया, फैसला मेरे पक्ष में  हो गया, वह अपने बच्चों के बारे में फैसला नहीं कर पा  रहा है, मैंने अपने बारे में फैसला ले लिया है ,मेरे बारे में फैसला  लेने वाले तुम कौन हो  ? अपने फैसले खुद लिया करो , अब तो उससे मेरा फैसला करा दो ,भाई  ऐसे  फैसले मत लिया करो , अब तो फैसला करना मजबूरी हो गयी है, सारा जीवन हम फैसला करने और न करने में निकाल देते हैं ,  घर में माँ बाप के फैसले बच्चों के फैसले ,  रिश्तदारों के फैसले और कई बार तो अनजान और अजनबियों के फैसले भी हमे कराने पड़ते हैं | 


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  कई बार स्थिति यह हो जाती है की हमारे फैसले से हमारे परिवार के लोग ही संतुष्ट नहीं हो पाते हैं  |  हमारे पड़ोसियों को कई बार हमारे फैसले से आपत्त्ति होती है |  कई बार हम अपने दोस्तों को भी अपने फसलों से नाराज कर देते हैं |  ये फैसले ही परिवारों में विवाद बढ़ा देते हैं  | पति पत्नी के रिश्तों में कड़वाहट पैदा कर देते हैं |  दोस्ती में दरारे डाल देते हैं बाप बेटों में टकराव हो जाता  है |  भाई- भाई में दुश्मनी हो जाती है |  पडोसी एक दूसरे को  टेढ़ी निगाहों से देखने लगते हैं | 


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|  यही वजह है की कई बार सीधे  साधे फैसले लेने  में  असमंजस हो जाता है |   मुश्किलें खड़ी हो जाती हैं |  हर कोई   फैसला सही गलत का नहीं बल्कि अपने पक्ष  में होने के इंतजार में रहता है |  इन्ही बातों की वजह से निर्णय लेना  मुश्किल  हो जाता है |   फैसला लेना अलग बात होती है |  सही है या  गलत है इसका निर्णय लेना अलग बात है |  इसलिए किसी भी विवाद का फैसला करने से पहले गलतियों को जुटाना और उनका विश्लेषण करना आवश्यक है |  कई बार पूर्व में किये गए कार्यों का आंकलन भी करना पड़ता है |  उसकी खामियों को नज़रअंदाज नहीं किया जा सकता |



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फैसला हमेशा देश, काल और परिस्थितियों को मध्य नज़र रखते हुए बिना ईर्ष्या, द्वेष और बिना क्रोध के लेना चाहिए |  तभी आपके फैसले को लोग सम्मनजनक अंक देंगे |  फैसला सही है या गलत है इसका निर्णय हम सिर्फ उस बात से नहीं ले सकते की वह हमारे पक्ष में नहीं है |  फैसला   नहीं लेना सबसे बुरा निर्णय होता है  | क्योंकि रुके हुए फसलों से हम कभी आगे नहीं बढ़ सकते |  रुका हुआ फैसला रुके हुए पानी की तरह होता है जो पीने योग्य नहीं होता |  हमारे फैसले बहती हुई नदी की तरह स्वच्छ और शीतल होने चाहिये  |



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