सास भी कभी बहू थी बहू भी कभी सास बनेगी सोच बदलो दुनिया बदलो

September 15, 2019

 प्राचीन काल में  महिलाये घर की चौखट तक सिमित थी 

घर गृहस्थी को चलने की सबसे ज्यादा जिम्मेदारी होती है महिलाओं  के ऊपर |  पुरुषो की जिम्मेदारी से भी इंकार नहीं किया जा सकता |  प्राचीन काल में  महिलाओ के व्यवहार उनके स्वभाव उनकी शारीरिक बनावट के आधार  पर महिलाये घर की चौखट तक सिमित थी |    इसीलिए सम्भवतया  पौराणिक काल में  घर गृहस्थी की जिम्मेदारी महिलाओ को  तथा व्यवसाय और नौकरी आदि के लिए  घर से बाहर की जिम्मेदारी पुरूषो को दी गई   थी |   परन्तु आधुनिक युग में जब आज महिलाओ को आगे बढ़ने के अवसर  प्रदान किये जा  रहे है    अपनी तरक्की के लिए उन्हें घर को छोड़ कर बाहर भी निकलना पड़ता है  |  घर गृहस्थी के काम भी निपटने पड़ते है  |

https://images.app.goo.gl/abPzeyY7vub5Jvu99


कामकाजी महिलाओं के योगदान को नकारा नहीं जा  सकता

  आज के युग में इस  जीवन शैली में घर खर्च चलना  अकेले   पुरुष के बस  की बात नहीं है |  ऐसे में  पति  पत्नि  मिल जुल कर यदि घर खर्च  चलाते है तो कहीं  न  कहीं  परिवार की अन्य आवश्यकताओ की पूर्ति  में कामकाजी  महिलाओं  के योगदान को नकारा  नहीं जा  सकता |  परन्तु दिक़्क़त  तब आती है जब छोटी छोटी बातो में पति  पत्नी के अहम टकराते है |  सास बहू की परेशानियों को समझे बिना मीन  मेक निकलना शुरू कर देती है  | महिला जब बाहर काम करती है तो उसे कई  सारी  परेशानियों से गुजरना पड़ता है शारीरिक और मानसिक कष्ट झेलने पड़ते है |  इन्हे सबसे ज्यादा समझने की जरूरत होती है पति  और सास को |
https://images.app.goo.gl/i5MPyMDyvnZzQGN36



  ऐसा नहीं है की आज भी सास की सोच वैसी ही बनी हुई है

जिन घरो में सास यह अच्छी तरह समझती है की वह  भी कभी बहू  थी उसके भी कुछ अरमान थे वह बहू  को बेटी मान कर उसकी वाजिब परेशानियों के हल निकालने की हर सम्भव कोशिश करेगी |  ऐसा नहीं है की आज भी सास की सोच वैसी ही बनी हुई है |  वक्त और परिस्थितियों ने आज हर व्यक्ति की सोच को परिवर्तित किया है शिक्षा ने आज हर सास को सोचने पर मजबूर कर दिया है की बहुओं  को बंधन में रखकर उन्हें कभी बेटी नहीं बनाया जा सकता |  और फिर उनकी बेटी भी तो किसी के घर की बहू  है |


https://images.app.goo.gl/DPnxGkUrJaviEyqw9


सास भी कभी बहू  थी बहू भी कभी सास बनेगी

  वहीं  सिर्फ सास के सोचने से काम नहीं चलेगा  बहुओ को भी सास को मान सम्मान देना होगा | पति और सास की नजरो में निस्वार्थ ऊपर उठना होगा यह भूलकर की वह एक कामकाजी और आधुनिक युग की महिला है  |  अपने आप को झुका कर  अपनी सोच को उठाना होगा और यह मानना पड़ेगा की बहू  भी कभी सास बनेगी  |  हर सास अपनी बहू  को यदि बेटी बना कर पालना शुरू कर दे तो ये सास बहू  के झगड़े ही खत्म हो जाये और यदि हर बहू  सास को माँ का दर्जा दिल से दे  तो भी यह सम्भव है | पुरूषों  के सामने यदि सबसे बड़ा तनाव है तो वह है सास बहू  के घरेलू झगड़ो का |  पुरुषो के तनाव को दूर करने में बहू  और सास दोनों अपना योगदान दे सकते है |  सास भी कभी बहू  थी बहू भी कभी सास बनेगी  सोच बदलो दुनिया बदलो  |

https://images.app.goo.gl/nwg7XQxVTok1FWzN7


लेख आपको कैसा लगा अपने अमूल्य सुझाव हमे अवश्य दे आर्टिकल यदि पसंद आया हो तो like , share,follow करें | 

No comments:

यदि आपको हमारा लेख पसन्द आया हो तो like करें और अपने सुझाव लिखें और अनर्गल comment न करें।
यदि आप सामाजिक विषयों पर कोई लेख चाहते हैं तो हमें जरुर बतायें।

'; (function() { var dsq = document.createElement('script'); dsq.type = 'text/javascript'; dsq.async = true; dsq.src = '//' + disqus_shortname + '.disqus.com/embed.js'; (document.getElementsByTagName('head')[0] || document.getElementsByTagName('body')[0]).appendChild(dsq); })();
Powered by Blogger.