दुनिया को बदलना इतना आसान नहीं है जब तक हम अपने आप को नहीं बदलेंगे

September 09, 2019
 जब तक हम अपने आप को नहीं बदलेंगे दुनिया  बदलना  आसान नहीं है

 दुनिया को बदलने के लिए कुछ बदलाव हमे अपने आप में भी करने पड़ते है |  दुनिया बदलने के चक्कर में हम यह भूल जाते की जिन चीजों का बदलाव हमे लोगो में करना है वही सब कुछ हमे अपने आप में  भी करना है |  हम लोगो  में बदलाव की अपेक्षा पाले  रहते है परन्तु ये नहीं सोच पाते है की लोग भी हम में कुछ बदलाव चाहते है |  जो बदलाव लोग हमारे अंदर चाहते है  उन पर हमारी नजर नहीं पड़ती |   यदि किसी की पड़ती है वो हम तक पहुंचना भी चाहता है तो हमारे अहंकार की वजह से उसे नजरअंदाज करते रहते |

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 नफरत, गुस्सा, द्वेषता पालकर रखना कुंठा कहलाता है

 अहंकार   जिसे हम स्वाभिमान समझने की भूल करते है यही दुनिया को और अपने आप को  बदलने में सबसे बड़ी बाधा है |  जिस दिन हम अहंकार को समझ कर और समझा कर इससे बचे रहेंगे दुनिया स्वतः ही नदियों की तरह बहती नजर आने लगेगी  |  नफरत, गुस्सा, द्वेषता पालकर रखना कुंठा कहलाता है  |  गुस्सा स्वावाभिक  क्रिया है गुस्सा हर किसी को  आता भी है परन्तु बात -बात में गुस्सा करना नफरत करना इसे पाल कर रखना हमे कुंठित करता है, मन को बेवजह दुखी करता है |  जब हम दूसरो में किसी बात को बदलना चाहते है तो हम खुद ही इन बातो के शिकार हो जाते है |   क्रोधवश  हम नफरत बड़ा लेते है , मन को दुखी कर के मन को कुंठित   कर लेते है |  इसलिए यदि किसी में बदलाव लाना चाहते है तो विनम्र बने रहे |  तर्क संगत बात करे, मन को बोझिल नहीं होने दे, सिर्फ आपनी  ही नहीं दूसरों  की बात को भी ध्यान पूर्वक सुने, समाधान से दूर नहीं भागे बल्कि समाधान का हिस्सा बने, हौसला अपना भी बनाये रखें  दूसरो को भी हौसला दे |



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  बहुत कम लोग स्वाभिमान की परिभाषा समझते है 

 बदलाव  के लिए जरूरी है स्वाभिमान और अहंकार के फर्क को समझना  | आज जो लोग अपने आप को स्वाभिमानी कहते है उनमे बहुत कम लोग स्वाभिमान की परिभाषा समझते है |  बुरे वक्त में किसी को मदद के लिए नहीं पुकारना स्वाभिमान नहीं होता |  आज अधिकतर लोग अपने बुरे समय में अपने रिश्तेदारों से दोस्तों से मदद लेने में संकोच करते है |  मर जाऊंगा  लेकिन उसके दवाजे भिक मांगने नहीं जाऊंगा आप गरीबी में किसी से आर्थिक  मदद नहीं ले, आप भूखे  रहकर अपना समय गुजर दे ये   स्वाभिमान हो सकता है |  परन्तु बिगड़ी बात के समाधान के लिए आप एक दूसरे के प्रति कुंठा पाल कर रखें   एक दूसरे के पास बैठ कर बात चित नहीं करें  ये  कभी भी स्वाभिमान नहीं हो सकता |  अपने दुष्मन की तर्क संगत बात को भी आप तर्क हीन बता दे ये स्वाभिमान नहीं अहंकार होता है | 


  
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 बदलाव के लिए जरूरी है स्वाभिमान कुंठा  और अहंकार में फर्क समझना

 अक्सर परिवारों में रिश्तेदारों में  दोस्ती में  पड़ोसियों में कड़वाहट आ जाती है और उस कड़वाहट की मुख्य वजह स्वाभिमान और अहंकार का सही अर्थ नहीं निकल पाना ही होता है  जो  बदलाव   हम दूसरो में चाहते है  यही बदलाव कोई हमारे अंदर चाहता है  हम उसे स्वाभिमान समझे बैठे रहते है इसी को दूसरो में अहंकार  कहकर साबित करने के लिए एड़ी  से चोटी तक का जोर लगा देते है |  बदलाव के लिए जरूरी है स्वाभिमान कुंठा  और अहंकार में फर्क समझना |  बदलाव लाने  की जरूरत है गुस्सा, नफरत और द्वेषता में |  चाहे वो हम में हो या दूसरो में |  और यह लाया जा सकता है प्रेम, मोहब्बत, सकारात्मक सोच  और मन को खुश और  प्रसन्न रखकर अहंकार और  कुंठा पाल कर कभी  न खुद में  बदलाव लाया जा सकता है न दुनिया में  |



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