सुख दुःख दोनों साथी हैं हम पक्के सहपाठी है

September 07, 2019
सुख दुःख हर व्यक्ति के जीवन में आते है चाहे वो अमीर  हो गरीब हो इंसान हो या भगवान हो राजा हो या रंक हो  दुनिया में कोई घर ऐसा नहीं है जिसने दुःख नहीं झेला हो कोई  घर ऐसा भी नहीं है जिसने सुख देखा ही न हो
जिसके जीवन में आज दुःख है कल उसके जीवन में सुख भी आएगा जिसके जीवन में आज सुख है उसके जीवन में कल दुःख भी आ सकता है इसलिए कभी सुख का अभिमान नहीं करना चाहिए न ही दुख का शोक मनाना चाहिए बल्कि दोनों को बांटते रहना चाहिए  जिसके जीवन में सुख है उसे दूसरो के दुःख में साथ देना चाहिए जिसके जीवन में दुःख है उसे अपना दुःख दूसरो से शेयर करना चाहिए ताकि दोनों साथ- साथ चलते रहे आज हम आपके लिए लाये है एक कविता जिसे पद कर आपको निश्चित तोर पर यह महसूस होगा  की सुख दुःख दोनों पक्के   सहपाठी है  | 
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सुख दुःख दोनों साथी हैं  हम  पक्के सहपाठी है

हम भी करते आंख मिचोली हास्य परिहास और ठिठोली

हम गीता में, हम कुरान में, हम वेदों में ,हम पुराण में

 थोड़ा सा तुम गौर करो तो मिल जायेंगे हर  जहाँन  में


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हम B.P  को  हाई  कराते लो B.P   भी हम ही कराते

 मावस की काली राते दुःख हैं, तो पूनम की धवल चांदनी सुख

गर्मी में सर्दी का सुख है, सर्दी में गर्मी का सुख है

गर्मी में गर्मी का दुःख है, सर्दी में सर्दी का दुःख है

सावन में झूलों का सुख  है, कहीं अतिवृष्टि ओलों का दुःख है

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हनुमान जी की चालीसा सुख है,  शनि की कुपित दृष्टि दुःख है

राम राज्य की कल्पना सुख है, गली- गली में रावण दुःख है

हम ही कृष्ण के मित्र सुदामा, हम ही कृष्ण के मामा  कंस

हम ही महाभारत की अंधी ,आँखें चौपड़ के पासे भी हम


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द्रोपदी का चीर हरण  हम,  बरसाने की राधा हम

सीता  जी की अग्नि परीक्षा, रावण का अभिमान हैं हम

हम ही कैकई की हठधर्मिता, रामायण की मंथरा  हम

 सुख दुःख दोनों साथी है,  हम  पक्के  सहपाठी है

  थोड़ा सा तुम गौर  करो तो मिल जायेंगे घर- घर में हम


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 सुख दुख कर लो दोनों सामान  इसका है बस यही उपाय

 ख़ुशी को दुगनी कर लोगे तो दुःख आधा रह जायेगा

दुःख को बांटो  आधा कर लो ख़ुशी को बाटों दुगना कर लो

 सोच बदल लो अपनी सभी लिख लो इसको तुरंत अभी

जब हो  जायेंगे सभी सुखी तो कौन कहेगा मैं  हूँ दुखी  ?

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