रिश्तो की अहमियत समझे इन्हे तपता हुआ रेगिस्तान नहीं बनने दे

September 04, 2019
जिस तरह बिना जल के इंसानी  जीवन सम्भव नहीं है |  प्यास लगने पर गला सूखने लगता है  | बिना जल  के फसलें  सूख  जाती है हरियाली समाप्त हो जाती है |  भूमि बंजर हो जाती है |  उसी प्रकार बिना रिश्तो के जीवन सूना  हो जाता है |  खुशहाली समाप्त हो जाती है |
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  जिस तरह बिना जल के कल नहीं जल ही जीवन है |  उसी तरह बिना रिश्तो के भी कल यानि भविष्य नहीं है |  रिश्तो से ही जीवन बनता है | जो लोग रिश्तो की अहमियत नहीं समझ पाते, रिश्तो के सुख दुःख का अंदाजा  नहीं लगा पाते , परिस्थितियों  को नहीं समझ पाते , रिश्तो के बनने बिगड़ने का अंदाजा नहीं लगा पाते |
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   वो लोग  अपने और दूसरो के जीवन को तपता  हुआ रेगिस्तान बना देते है |  जहां दूर -दूर तक छाया नजर नहीं आती, हरियाली नजर नहीं आती , जीवन दिखाई  नहीं देता | ऐसा इंसान खुद भी अकेला पड़  जाता है |   दूसरो को भी अकेला कर देता है  |
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 अकेलापन  बंजर भूमि की तरह हो जाता है  | उन रिश्तो को भी थका देता है जो रेगिस्तान में भी  प्यार मोहब्त  की बारिश से हरियाली लाने की कोशिश करते है |  रेतीले तूफानी बवंडरों से लड़ने का माद्दा रखते है  |  बंजर भूमि को हरा भरा बनाने के लिए जी तोड़ मेहनत करते है |  इसलिए रिश्तो की अहमियत समझे इन्हे तपता  हुआ रेगिस्तान नहीं बनने दे |  बल्कि प्यार मोहब्बत की बारिश से हमेशा  हरा भरा बनाये रखें  | जिन रिश्तो में प्रेम नहीं होता वो तपता  हुआ रेगिस्तान बन जाते है |   

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