संस्कार और नैतिकता सिखने के लिए इंसान को अपनों के बीच ही रहना पड़ता है

September 23, 2019
 जीवन को हमेशा इंसान की क्षमताओं काबिलियत  और व्यवहार से आंकना चाहिए

जीवन को कभी भी अमीरी- गरीबी सफलता -असफलता  से नहीं आंकना चाहिए  | जीवन को हमेशा इंसान की क्षमताओं से आंकना चाहिए | उसकी काबिलियत  और व्यवहार से आंकना चाहिए | ऐसा नहीं है कि   जिस व्यक्ति के पास पैसा है वही  सफल व्यक्ति है |  क्या कोई गरीब व्यक्ति सफल व्यक्ति नहीं कहला  सकता ?  क्या सिर्फ एक पड़ा लिखा व्यक्ति ही सफल व्यक्ति  है  ?  दुनिया में ऐसे कई  उदाहरण आज भी मिल जाएंगे  जिन्होंने गरीब होते हुए भी अभावो में रहकर भी कुछ ऐसा कर दिखाया जो एक साधन सम्पन्न सुख सुविधाओं में जीवन जीने वाला व्यक्ति नहीं कर सका |   कई  बार अनपढ़ व्यक्तियों ने, कम पड़े लिखे व्यक्तियों ने वो कर दिखाया  जो एक उच्च शिक्षित व्यक्ति नहीं कर सका |


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संस्कार और नैतिकता सिखने के लिए इंसान को  अपनों के बीच  ही रहना पड़ता है

  इंसान की अमीरी गरीबी और पढ़ाई  लिखाई  के प्रति ये धारणा  बिलकुल गलत बनी हुई है |  पढाई  लिखाई  से इंसान अपने जीवन स्तर को  ऊँचा उठा सकता है, अपनी आय के स्त्रोत बड़ा सकता है, परन्तु  संस्कार और नैतिकता सिखने के लिए इंसान को  अपनों के बीच  ही रहना पड़ता है |  रिश्तो को जोड़ कर रखना पड़ता है |  जरूरी नहीं की उसके सभी अपने उच्च स्तर  तक पढे  लिखे हो, जरूरी नहीं की उनकी भाषा रहन- सहन उच्च स्तर तक पढ़े  लिखे लोगो की तरह हो |  परन्तु यह जरूरी है की  उनमे जीवन को जीने और   संवारने के आवश्यक गुण यथा  शिष्टाचार हो, अदब हो, अपनापन हो, प्यार मोहब्बत हो, मानवीय दृष्टिकोण हो |  पढ़ाई  लिखाई  का असली मकसद भी यही होता है | 
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 इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता की  व्यक्ति पढ़ा  लिखा है या कम पढ़ा  लिखा अमीर है या गरीब 

 व्यक्ति में जीवन जीने के आवश्यक गुण  मौजूद हो तो इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता की वह पढ़ा  लिखा है या कम पढ़ा  लिखा |  वह अमीर है या गरीब फर्क तो इस बात से पड़ता है की यदि एक पड़े लिखे व्यक्ति में आर्थिक समझ न हो जिससे वह घर गृहस्थी  के खर्चो  का  अंदाजा न लगा सकता हो, फर्क पड़ता है जब वह उसके हित  की बातो को अभिमान में रहकर समझना ही नहीं चाहता हो, फर्क इस बात से पड़ता है की वह अपने पढाई  लिखाई  के वजन को सिर  पर लिए घूम रहा हो |   प्यार मोहब्बत और इंसानियत  के लिए न पैसो को जरूरत होती है न पढाई  लिखाई की   ये तो मन के सौदे होते है  | 


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जहाँ   रिश्ते निभाने की कला नहीं होगी वहाँ अमीरी भी  गरीबी बन जाएगी

  प्यार मोहब्बत और रिश्तो को निभाने के लिए तो मात्र दिल की और अपनेपन की जरूरत होती है |  जहाँ  यह दोनों होंगे वहाँ  पति  पत्नी भी खुश होंगे बच्चे भी खुश होंगे माता पिता भी खुश होंगे सास बहू  भी खुश होगी जहाँ   रिश्ते निभाने की कला नहीं होगी वहाँ अमीरी भी   गरीबी बन जाएगी पढ़े  लिखे लोग भी अनपढ़ कहलायेंगे   | 
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