एक के साथ एक फ्री है जितना चाहो उतना ले सकते हो

August 18, 2019
चारों और दुःख का साया  छाया हुआ  है  |  एक के साथ एक फ्री  है जितना चाहो उतना ले सकते हो |   जगह- जगह ढेर लगे हुए हैं |  जो पहाड़ों में तब्दील  होते नज़र आ रहे हैं |  घर भरे पड़े हैं, गोदाम भरे पड़े हैं कोई मुफ्त में भी लेने  वाला नहीं है |  फ्री भी कितना बाँटोगे सबके पास बहुत भरा पड़ा है |  पहले फिर भी एक दूसरे के ले लिया करते थे अब खुद के पास ही इतना होता है की दूसरों के लिए फुर्सत ही नहीं मिलती |  फिर कुछ दुःख तो आउट ऑफ़ डेट हो चुके हैं  |  मार्किट में नए- नए आ रहे हैं |   फैशन है नहीं लेंगें  तो लोग क्या कहेंगे ?   उनका स्वाद चखना भी ज़रूरी है |
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  नयों को लेने के चक्कर में पुरानो  को इधर उधर फेकना पड  रहा है |  जगह सही दिखाई नहीं दे रही है |  पडोसी - पडोसी के घर में ही फेंक  रहा है |  भाई- भाई को ही दे रहा है |  स्थिति यह हो गयी है की राह चलते एक दूसरे को बिना वजह ही दे रहे हैं |  अब तक तो सुनने में यही आ रहा था पुरुष महिलाओं को दुःख दे रहे हैं लेकिन आज कल तो बेचारे पुरुष भी अत्याचार का शिकार होने लगे है |  ये अलग बात है की गलती पुरुष की होती है या महिला की गलती   चाहे महिला की  हो या पुरुष की  दुःख तो सारे परिवार को ही भोगना पड़ता है


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  इसलिए दुःख जिसे भी दें   सोच समझकर दें क्योंकि एक व्यक्ति के दुखी होने से पूरा परिवार दुखी हो जाता है |  और परिवार का यह दुःख जब पड़ोसियों  तक पहुँचता है तो पडोसी दुखी होते हैं और पड़ोसियों से मोहल्ला, मोहल्ले से गांव, गांव से शहर , शहर से देश इसकी चपेट में सभी आते हैं और  चपेट में आ  जाएंगे तो आसूं, खून,  और पैसे का बहना स्वाभाविक है |  इनका बहना ही सबसे बड़े दुःख का कारण  है |  इसलिए   दूसरे के आसुओं की परवाह  करे जल ही जीवन है इसे बहने से रोके पर्यावरण बचाये चारों ओर हरियाली होगी खुली हवा में सांस लेंगे तो दुखों के ये पहाड़ स्वतः ही टूट कर गिर जायेंगे |
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  छोटी -छोटी बातों में लोग एक दूसरे के खून के प्यासे हो गए हैं यह परिवार और देश के लिए दुःख का सबसे  बड़ा कारण है  |  इससे भी बड़ा दुःख का कारण  है पैसा ? पैसा कमाना कोई बुरी बात नहीं ,पैसे वाला होना कोई बुरी बात नहीं , बुरी बात है पैसा बहाना लोग अपनी  शान शौकत दिखाने के लिए, अपना प्रभाव ज़माने के लिए पैसे को बेवजह बहा रहे हैं |  जो दुःख का बड़ा कारण है जिस दिन हम आसूं, खून, पानी और पैसा बहाना बंद कर देंगे उस दिन दुखों के ये पहाड़ भी बनना बंद हो जायेंगे | 

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