लड़ाई झगड़ा या मरना मारना किसी भी परिस्थिति का उचित समाधान नहीं है

August 13, 2019
जीवन एक संघर्ष है जिसमे लोग अपना सब कुछ खो देने के बाद निराश हो जाते हैं और गलत कदम उठा लेते हैं |गलत कदम दो तरीके से उठाये जाते हैं |  एक तो खुद को ख़त्म  करके दूसरा  दूसरों को खत्म करके |  तरीके दोनों  ही गलत हैं |  हमे इस पर मनन करने की आवश्यकता है |  जब हम दुनिया में आये थे तो क्या लेकर आये  थे ? जो कुछ हमने हांसिल किया उसमे सिर्फ हमारा ही योगदान नहीं होता चाहे वो धन दौलत हो प्रतिष्ठा हो सफलता हो |


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इंसान की प्रतिष्ठा तथा  सफलता में कई लोगों का अप्रत्यक्ष हाथ होता है |  परन्तु गलत फहमी अधिकतर लोगों को यह होती है की उनकी खुद की मेहनत से उन्होंने धन दौलत सफलता प्रतिष्ठा हांसिल की है |  यह सच है की धन संपत्ति प्रतिष्ठा सफलता हांसिल करने में खुदकी मेहनत लगन मायने रखती है |  लेकिन दूसरों के योगदान को भी नाकारा नहीं जा  सकता |


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मुद्दा  यह है की जब हम असफल होते हैं नुक्सान उठाते हैं तो हम उसके लिए दूसरों को  गलत  ठहरा देते  हैं |  जबकि कमियां हमारी भी होती हैं जब हम सफल होते हैं तो सफलता में दूसरों की मेहनत परिश्रम को भूल  जाते है |  असफलता में अक्सर हम क्रोध व हिंसा का रास्ता अपना लेते हैं |  और अच्छे बुरे का ख्याल त्यागकर लड़ाई झगडे या मरने मारने पर उतारू हो  जाते  हैं |  उस वक्त हम उससे होने वाले परिणामों पर भी गौर नहीं करते हैं |  दूसरी ओर कुछ लोग इस स्थिति में अपने  आप को सम्भालने हिम्मत जुटाने या समझदारी से काम लेने की बजाय निराश होकर आत्महत्या तक कर  लेते हैं |


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जबकि विपरीत परिस्थियो  में हमे सकारात्मक सोच रखकर हिम्मत और धैर्य से परिस्थतियों  का मुकाबला करना चाहिए | लड़ाई झगड़ा या मरना मारना   किसी भी परिस्थिति का उचित समाधान नहीं है |  क्योंकि इन दोनों ही स्थितियों  में हमारी और परिवार की दुर्दशा  होनी ही है |  यदि हम ठन्डे दिमाग से सोचे तो हो सकता है हम उन्ही लोगों के सहयोग से स्थिति को सुधार सकते है  जिन्हे हम दोषी समझ रहे हैं |  ऐसा संभव न भी हो तो हमे धैर्य से काम लेना चाहिए जीवन में कई अवसर ऐसे आते हैं  जब गृह योग पुनः बनते हैं | कुछ करने के अवसर मिलते है  हौसला यदि हो तो  कुदरत को भी साथ देने के लिये  मनाया जा सकता है  |   और खोई हुई प्रतिष्ठा पाई जा सकती है |
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