हम यदि किताब के पेज है तो माँ पूरी किताब है हम शब्द है तो माँ भाषा है

August 12, 2019
 परिवार में एक  मां ही होती है जो परिवार को बांध कर रख सकती है मां अपने परिवार के लिए जितनी क़ुरबानी देती है शायद ही कोई और देता है माँ अपने बच्चो को पालने के लिए क्या क्या नहीं करती इस लिहाज से यदि देखा जाये तो   हम यदि किताब के पेज है तो माँ पूरी किताब है हम शब्द है तो माँ भाषा है   माँ तो माँ है माँ की इससे बड़ी क्या परिभाषा है  |
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वास्तव में  दुनिया में भगवान से भी बड़ा कद  किसी  है तो   वह है  मां | क्योंकि  भगवान आदमी तो बना  सकता है परन्तु  उसे संस्कार  देकर इंसान बनाने का काम मां  के सिवा  कोई और नहीं कर सकता |
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 आज का दौर  मिलावट का  दौर है बिना मिलावट के किसी चीज की अपेक्षा नहीं की जा  सकती |   स्वार्थ की वजह से प्यार मोहब्बत पर   भी मिलावट के  रंग देखे जा सकते है |  परन्तु माँ की ममता में  कभी  मिलावट नहीं हो सकती |

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 देख रहा हूँ माँ की मजबूरी पर पता नहीं   बड़ा होने पर माँ का यह  साडी का पालना याद  रहेगा या  मै भी अपनी ख्वाइशों की पूर्ति में इस दिन को भूल जाऊंगा |   ईश्वर मुझे  ऐसा दिन मत दिखाना  जब मै अपनी माँ की इस पीड़ा को भूल जाऊँ |   

वास्तव में यह बहुत बड़ी विडंबना है की जिन कष्टों को सह  कर माँ बचपन में बच्चो को पालती  है  बड़े होकर बहुत कम लोग याद रख पाते है माँ के एहसानो का कर्ज कोई नहीं उतार  सकता आज की युवा पीढ़ी को इस  देख कर सीख  लेने की जरूरत है उन लोगो को भी अपना अतीत याद   करने  की   जरूरत है जो 
 अपनी माँ को बोझ समझते है |  इस तस्वीर को देख कर एक बार अपनी माँ के एहसानो को जरूर याद  करें |  


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