बुद्दिमान सिर्फ हम ही नहीं दूसरा भी हो सकता है कछुए और खरगोश की नई प्रेरणादायक कहानी

July 22, 2019
                           ये  है कछुए   और खरगोश  की नई प्रेरणादायक   कहानी

यह कहानी तो आपने सुन ही रखी है की कछुए ने धीरे ही सही पर लगातार चल कर रेस जीत ली |  लेकिन खरगोश को जब अपनी गलती का एहसास हुआ तो उसने अपनी गलती स्वीकारते हुए दोबारा दौड़ लगाने के लिए कछुए को राज़ी कर लिया |
                                                   
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कछुवे को भी जीत  का नशा था उसने बिना सोचे समझे अहंकार में चेलेंज स्वीकार कर लिया |  निश्चित रूप से इस बार खरगोश तेज़ दौड़ा और अपनी गलती दोबारा नहीं दोहराई |  और रेस जीत गया कछुए को इस बात का पछतावा नहीं हुआ लेकिन उसने आत्म मंथन किया  |  यही सोचा की इस तरह से तो में कभी किसी से रेस जीत ही नहीं पाउँगा |

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  इस बार कछुए ने खरगोश को हराने के लिए एक उपाय सोचा |  कछुए ने खरगोश को एक शर्त के साथ दोबारा चैलेंज दिया |  उसने खरगोश से कहा की इस बार दौड़ मेरे बताये रस्ते पर होगी |  खरगोश ने बिना विचार करे अपने जीत के  घमंड में हाँ कर  दी |

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कछुए ने जो रास्ता दौड़ के  लिए चुना उसके बीच में नदी पड़ती थी  | खरगोश नदी पार  नहीं कर सका और कछुआ नदी पार करके रेस जीत गया इस बार इस कहानी का मोरल बदल गया | बुद्दिमान सिर्फ हम ही नहीं दूसरा भी हो सकता है |  इस कहानी से हमे  सबक लेना  चाहिए आप भले ही  कितने  भी  समझदार हो परन्तु हमे यह भी स्वीकारना चाहिए की  दूसरे भी समझदार हो सकते है |  आप कितने ही सही हो परन्तु दूसरे भी सही हो सकते है |  हमे कभी भी किसी को कम नहीं आंकना चाहिए | 

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