जीवन जीने और रिश्ते निभाने की कला ही जीवन की ष्पौष्टिकत कहलाती है

July 08, 2019
  पौष्टिक जीवन जीना भी एक कला है 



                                                                            आज अधिकतर लोग जीवन तो जी रहे है  लेकिन पौष्टिक जीवन बहुत कम लोग जी रहे है | पौष्टिक जीवन जीना भी एक कला है | एक साधना है |   जीवन और रिश्तो का पौष्टिक होना उतना ही जरूरी है जितना हमारे शरीर के लिए भोजन का पौष्टिक होना |  जीवन जीने और रिश्ते निभाने की कला   ही जीवन की पौष्टिकता कहलाती है |  वैसे तो यह कला प्राकृतिक होती है परन्तु यदि किसी के पास नहीं भी है तो जीवन के अनुभवों से भी सीख  लेकर इसे पौष्टिक बनाया जा सकता है |  
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 BE POSITIVE YAAR | 

जीवन और रिश्तो को पौष्टिक बनाने के लिए सोच का सकारात्मक होना बहुत ही जरूरी है |  लेकिन अधिकतर लोग सकारात्मकता का सही अर्थ ही नहीं समझते है और कहते रहते है BE POSITIVE YAAR BE POSITIVE  |   जब भी कोई  अप्रत्याशित घटना घटित होती है तब  दिलासा देने के लिए अक्सर  सभी के मुहँ  से यही निकलता है  BE POSITIVE YAAR |   परन्तु POSITIVE होते कैसे है ये हमे खुद पता नहीं होता है |  इसलिए  BE POSITIVE YAAR कह कर हम इसकी इति श्री कर लेते है |  POSITIVE होने का सीधा अर्थ  है ऐसा काम करना जो न सिर्फ हमारे हक़ में हो बल्कि सामूहिक हित  में भी हो |  जबकि POSITIVE होने का अर्थ अधिकतर लोग  सिर्फ अपने  हित  में पोजेटिव होना मानते है |  


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  जीवन जीने की कला सीखना बहुत ही जरूरी है 


                                यही वजह है की हम सामूहिक हित  नहीं सोच पाते है |   हमारे हित  में कोई बात नहीं होने पर तुरंत नकारात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त कर देते है |  और किसी भी तरह से समाधान का हिस्सा नहीं बन पाते |  हमारी बात पर ही अड़े रहते है |  यही  NEGETIVITY कहलाती है |  समाधान  का हिस्सा नहीं बन पाना, किसी की बात नहीं सुनना  यही रिश्तो की पौष्टिकता को खत्म करता है |  रिश्तो की पौष्टिकता हमेशा सकारात्मक सोच पर निर्भर करती है |  जो लोग समस्याओं का समाधान निकालना जानते है उन्हें हेंडिल करना जानते है |   वो रिश्तो को   पौष्टिक बना  कर चलते है |  इसके विपरीत जो लोग बात- बात में तनाव लेते है, निराश हो जाते है, बात- बात में गुस्सा प्रकट करते है, दुखी होते रहते है,  किसी पर भी  दोषरोपण करना उनकी आदत बन जाती  है |  उन्हें जीवन जीने की कला सीखना बहुत ही जरूरी है  | 


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जीवन और रिश्तो की खुशहाली पौष्टिकता पर ही निर्भर होती है 





                                                                                                  रिश्तो के टूटने और बिखरने की मुख्य वजह  जीवन जीने की कला का  न होना है |   समस्याएं पल- पल पर आती है कोई परिवार ऐसा नहीं है जिसको समस्याओ का सामना न करना पड़ता हो |  लेकिन जिसने इन समस्याओ के समाधान हँसते मुस्कुराते निकाल  लिए , जिसने इन्हे जीवन का हिस्सा मान कर इनसे लड़ने के बजाय इनका स्वागत कर इनकी खातिरदारी कर इन्हे ठीक तरह से विदा करना सिख लिया, जिसने इन्हे ठीक से हेंडिल करना सिख लिया, उसने जीवन और रिश्तो को पौष्टिक बना दिया  | जीवन और रिश्तो की खुशहाली पौष्टिकता पर ही निर्भर होती है | इसलिए जीवन जीने की कला सीख कर रिश्तो  को पौष्टिक जरूर बनाइये |

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