जिस तेज गति से जीवन चल रहा है यह स्वाभाविक जीवन नहीं है फिर क्या यह जीवन का कृत्रिम दौर है

July 13, 2019
जीवन से जुड़े मुद्दों पर आज हम कंफ्यूज हो चुके हैं जिस तेज गति से जीवन चल रहा है यह  स्वाभाविक जीवन नहीं है  |  यह जीवन का कृत्रिम दौर है |  प्रकृति से हमने दूरी बहुत बना ली है |  हर चीज़ में हमारी निर्भरता दूसरों पर है  | स्वाभाविक जीवन को भूल कर अब हमने दूसरों के  भरोसे जीवन जीना शुरू कर दिया है |
https://images.app.goo.gl/3XRjbMDtCGpERH4D8

 शिक्षा

  बच्चों की शिक्षा के लिए हम पूरी तरह से स्कूलों पर निर्भर हो  चुके हैं |  उनके उठने बैठने से लेकर खान- पान और अनुशासन तक सारी  जिम्मेदारी हम स्कूलों को दे चुके हैं | हम यह भूल चुके हैं की बच्चे की पहली पाठशाला  उसका घर होता है | सिर्फ किताबी ज्ञान को शिक्षा मान लेना पूर्ण शिक्षा  नहीं है | ही हम उन्हें सुख सुविधाओं का आदि बना रहे है |आगे चल कर जब उन्हें ये सुविधाएं नहीं मिल पाती है तो वो खुद भी होते है दूसरो को भी दुखी  करते है  | 

घरेलू नुस्खे

  छोटी- छोटी बातों में हम डॉक्टर की शरण में पहुँच जाते हैं |  स्वास्थ्य के लिए हम पूर्ण रूप से डॉक्टर पर निर्भर हो चुके हैं |   घरेलू नुस्खे हमने अमल में लाना छोड़ दिया है |  छोटी  छोटी बीमारियां जिनके ईलाज  हमारे बुजुर्गो  के नुस्खे अपना कर हम घर पर ही कर  सकते है उनके लिए भी हम बड़े बड़े हॉस्पिटल्स में जाकर मोटा पैसा खर्च कर रहे है सिर्फ हमारी शान दिखाने के लिए |
https://images.app.goo.gl/xQkKidgW7Ahk4Trr8


प्रेरणाएं

   और तो और जो हिम्मत, जो सलाह ,जो मोटिवेशन, जो प्रेरणाएं हम अपने बुजुर्गों,  परिवार के सदस्यों, इष्ट मित्रों से ले सकते हैं अपने  आप से ले सकते हैं उसे हम हज़ारों रूपये खर्च करके मोटिवेशनल  गुरुओं की शरण में जाकर लेने में गर्व महसूस करते हैं | यह कन्फ्यूजन हम दूसरो के देखा देखी जीवन जीने की वजह से पैदा कर चुके है जबकि जिंदगी हमे हमारी परिस्थितियों के मुताबिक स्वाभविक तौर  पर जिनी  चाहिए
https://images.app.goo.gl/pnqHESsryofiT4oX7



 जानकारियां

  जो जानकारियां हम अपने खुद के जीवन  ,  गलतियों ,  स्वभव से तथा अपने- अपने परिवार के  इष्ट मित्रों, अपने पुरखों के जीवन से ले सकते हैं उन्हें भी कही न कही किसी बड़े संस्थान  की तलाश कर भारी भरकम पैसा खर्च करके  लेने की कोशिश करते हैं |  यह कन्फ्यूजन हम दूसरो के देखा देखी जीवन जीने की वजह से पैदा कर चुके है जबकि जिंदगी हमे हमारी परिस्थितियों के मुताबिक स्वाभविक तौर  पर जीना   चाहिए | आधुनिक जीवन जीना कोई बुरी बात नहीं है परन्तु जहां आवश्यकता ही नहीं है वहाँ  पैसा खर्च करके हम अपने ऊपर आर्थिक बोझ ही बढ़ाते है |

 लेख आपको कैसा लगा अपने अमूल्य सुझाव हमे अवश्य दे आर्टिकल यदि पसंद आया हो तो like , share,follow करें | 

No comments:

यदि आपको हमारा लेख पसन्द आया हो तो like करें और अपने सुझाव लिखें और अनर्गल comment न करें।
यदि आप सामाजिक विषयों पर कोई लेख चाहते हैं तो हमें जरुर बतायें।

'; (function() { var dsq = document.createElement('script'); dsq.type = 'text/javascript'; dsq.async = true; dsq.src = '//' + disqus_shortname + '.disqus.com/embed.js'; (document.getElementsByTagName('head')[0] || document.getElementsByTagName('body')[0]).appendChild(dsq); })();
Powered by Blogger.