इंसान सुख सुविधाओं की चाहत में मन को दुखी कर लेता है

July 31, 2019
इंसान सुख सुविधाओं की चाहत में मन को दुखी कर लेता है | यह मन का दुखी होना ही  जीवन का  सबसे बड़ा दुःख है |   हमारे मन के  दुखी होने की वजह से हम खुद तो दुखी होते ही है दूसरो को भी बे वजह  दुखी  करते है  और दूसरो के समझाने के बावजूद इस बात को समझ ही नहीं पाते है  कि  यह दुःख सुख सुविधाओं  के अभाव  का नहीं बल्कि  मन के अभाव का होता  है |
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   यह बात बहुत काम लोग समझ पाते है कि  दुःख  सुविधाओं के आभाव का नहीं होता दुःख होता है हमारे मन का  | जो लोग ये समझते है की सुख सुविधाओं का आभाव है परन्तु हम इसके बिना भी जिंदगी तो जी ही सकते है  |  वो अपने मन को दुखी नहीं करते है |  जो लोग  यह  बात नहीं समझते है वो सुख सुविधाओं का रोना रो- रो कर मन को दुखी करते रहते है  | और गलत फहमी ये पाल लेते है कि  सुख सुविधाएं नहीं मिलने से दुखी है |
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दुनिया में कई  लोग ऐसे है जिन्हे कई  बार अनुकूल परिस्थितियों में भी सुविधाये  नहीं मिल पाती  |  लेकिन वो अपने मन को दुखी नहीं करते असुविधाओं के बावजूद उनके चहरे पर प्रसन्नता झलकती है, उत्साह नजर आता है, उनकी उमंगे छलांगे मारती नजर आती है | इसलिए उपाय  सुख सुविधाओं का करने के बजाय  मन का करे  |  क्योकि सुविधाएं आज है कल  हो न हो  |

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जीवन में आगे न जाने कितनी असुविधाएं सामने आएगी परन्तु मन को खुश रखने का उपाय ढूंढ  लिया, मन को खुश रखना जिसने सीख लिया उसे सुख सुविधा का आभाव कभी नहीं खलेगा | इस मन को खुश रखने की सबसे अच्छी दवा है प्रेम  | जिसने जीवन में प्यार मोहब्बत को पाना सीख  लिया, पहचानना सीख लिया देना सीख लिया वह  बिगड़ी हुई परिस्थितियों तथा  असुविधाओं में निराशा, हताशा , दुःख  मायूसी को पास भी नहीं फटकने देगा  | 
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