सपने और चिंताए ही हमे आर्थिक , मानसिक और शारीरिक रूप से कमजोर बनाने का काम करते है

July 02, 2019
हर व्यक्ति जिंदगी जीना चाहता है लेकिन किसके लिए ये आज तक संशय का विषय है|  कोई कहता है में अपने बच्चों  के लिए जीना चाहता हूँ |  कोई   माँ बाप के लिए जीना चाहता है |  कोई रिश्ते नातो  के लिए जीना चाहता है |  कोई देश के लिए तो कोई समाज के लिए |  कहते सब यही है  लेकिन जीते नहीं है  |  बहुत ही कम लोग है जो वास्तव में जीवन जी पाते है  |
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 अधिकतर लोग इसी द्वन्द में कि मुझे कुछ करना है अपने आप को तिल तिल मारते रहते है और  रोते  झींकते जिंदगी जीते रहते है |  उन्हें यही पता नहीं होता की इस जीवन का करना क्या है ?   बस कुछ करना है कह- कह कर  हाय तोबा मचानी है |   माना की हर शख्स की जिम्मेदारियां होती है, कर्तव्य  होते है,  भावनाये  होती है ,दृष्टिकोण होते है ,लेकिन उन्हें पूरा करने के लिए कुछ करना भी  पड़ता है |  सिर्फ चिंता करने और सपने देखने  से कुछ हासिल नहीं होता है |
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  ये सपने और चिंताए ही हमे  आर्थिक ,  मानसिक और शारीरिक रूप से कमजोर बनाने का काम करते  है |  इन सपनो तथा  चिताओं की वजह से कब हम हँसते खेलते परिवार को और अपने आप को दुखो के अधीन  कर देते है हमे पता ही नहीं चल पाता है|   कुछ कर गुजरने  रिश्तों को निभाने और प्यार मोहब्बत की फसल काटने के चक्कर  में  अधिकतर लोग काँटों के बीज  बो देते है |  जब बीज ही काँटों के बोयेगे तो आम कहाँ  से पैदा होंगे  | जीना हम दूसरो के लिए चाहते है लेकिन खुद  को तिल  तिल  मार कर
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 क्या  अपने आप को मार कर अपने आप को बेवजह दुःख पहुँचाकर हम  कभी  दूसरों  को जिन्दा  रख सकते है ?  यदि दूसरों  को खुश देखना चाहते है उनके सपने पूरे करना चाहते है  तो अपने आप को  जिन्दा रखें  खुश रखें प्रसन्नचित रहें  | कुल मिला कर  काम ऐसा करे साँप भी मर जाये लाठी भी न टूटे |   जिम्मेदारियां तथा कर्तव्य भी पूरे करे लेकिन बेवजह अपनी जिंदगी दांव पर लगा कर नहीं |  ये जीवन हमे जीने के लिए मिला है इसे बालों की तरह उलझकर तनाव ग्रस्त करके जीने की बजाय पानी की तरह निर्मल और स्वच्छ बहकर भूत  भविष्य में जीने के बजाय वर्तमान में जियें  | आपके और आप के अपनों के  सपने तभी पूरे होंगे  | 

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