अभिमान छोड़ कर दोबारा जोड़ लीजिये रिश्ते की डोर को

July 23, 2019

हर व्यक्ति एक दूसरे के लिए अच्छा नहीं होता बल्कि बहुत अच्छा होता है | लेकिन सिर्फ जब तक ही होता है जब तक कि
कोई विवाद नहीं हो | विवाद होने के बाद दोनों एक दूसरे के विरोधी हो जाते हैं | एक दूसरे पर कीचड़ उछालने लग
जाते हैं | यह भी भूल जाते हैं कि दोनों ने एक-दूसरे के लिए कुछ तो अच्छा किया ही होगा | जब विरोध शुरू होता है
तो शुरू होता है पाई-पाई का हिसाब किताब खाने पीने से लेकर एक दूसरे के ऊपर किए गए खर्चों की, लिस्ट बनने
लगती है |
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लेकिन यह हिसाब किताब कभी भी सही नहीं हो सकता | क्योंकि हमारे पास इसका कोई लेखा-जोखा नहीं होता है
न ही हर पल को हम कैमरे में कैद कर सकते हैं | किस वक्त हमने मदद की किस वक्त दूसरे ने हमारी मदद की |
किस समय हमने दूसरों का तनाव हल्का किया किस वक़्त दूसरे ने हमारा | ऐसे समय में सिर्फ हम उन्हीं बातों को
उन्ही अच्छाइयों को ढूंढ- ढूंढ कर निकालते हैं जो हमने दूसरों के लिए की | दूसरा भी यही कर रहा होता है |
सिर्फ अपनी- अपनी अच्छाइयां गिना कर शुरू हो जाती है एक दूसरे पर दोषारोपण की प्रक्रिया | गलतियां , बुराइयां , नुकसान जो एक दूसरे को दिए उसे न हम सुनना चाहते हैं न दूसरा | इन्हे हम सिर्फ उस वक़्त सामने लाना चाहते हैं जब दूसरों की अच्छाइयों का पलड़ा भारी लगने लगता है तब हम हमारी नहीं दूसरों की गलतियां सामने लाते हैं यही काम दूसरा भी कर रहा होता है |
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क्या कभी आपने यह बात सोची है की क्यों आप उस व्यक्ति के विरोधी हो गए जो आप से प्रभावित था ? या क्यों कोई आपका विरोधी हो गया जिससे आप प्रभावित थे ? यदि वास्तविकता जानना चाहते हैं तो बनाईये एक लिस्ट ऐसे व्यक्तियों की जो कभी आपको बहुत अच्छे लगते थे जिन्होंने आपका दिल जीत लिया था | जिनके विचारों से आप पूर्णरूप से सहमत हुआ करते थे | जिनकी सलाह आपके लिए बहुत मायने रखती थी | अब ऐसे व्यक्तियों की सूची बनाएं जो आप को बड़े समझदार समझते थे आप को मान सम्मान देते थे | आपकी सलाह के बिना एक कदम भी आगे नहीं बढ़ाते थे | आपकी तारीफों के पुल लोगों के सामने बांधा करते थे | आपसे प्रेरणा लिया करते थे लेकिन वे आज आपके विरोधी हैं |

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| अब याद कीजिए उन पलों को जब आप मुसीबत में थे शायद आप के जो आज विरोधी है उन्होंने भी आपकी मुसीबत में आपका साथ दिया होगा क्योकि उस वक्त वो आपके करीबी थे या उस वक्त आप दोनों के संबंध अच्छे थे अब याद कीजिये उन पलों को जब आपने भी कभी उनकी मुसीबत के समय में साथ दिया होगा | अक्सर हम सभी के जीवन में कई लोग ऐसे आते हैं जो हमारे लिए हर एंगल से महत्वपूर्ण होते हैं | हम उनके लिए महत्वपूर्ण हो जाते हैं | परन्तु सिर्फ हमारे स्वार्थ गलत फहमियाँ हमें एक दूसरे से दूरी बनाने पर मजबूर कर देती है |
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क्या आपके जीवन में ऐसा वक़्त आया है जब आप किसी के सबसे करीब रहे हो और आज उसे सबसे ज्यादा दूर महसूस कर रहें हो ? क्या कभी ऐसा वक़्त आया है जब किसी ने आप को सबसे करीब पाया हो और आज आप की दूरी उससे सबसे ज्यादा हो ?कारण जानने की आज ही कोशिश करें कुछ अपनी कहें कुछ उनकी सुने | खोल दें मन की गांठे शायद आपके और उनके गिले-शिकवे दूर हो जाए ,गलत फहमियां दूर हो जाये | क्योकि जब रिश्ते बिगड़ते है तब हमे सिर्फ अपनी अच्छाइये ही याद् रहती है दूसरे के द्वारा किये गए कामों को अक्सर हम काम आँकते है या भूल ही जाते है | यही स्वार्थ रिश्तो में खटास और कड़वाहट लाने का काम करता है | अपना अपना अभिमान छोड़ कर दोबारा जोड़ लीजिये रिश्ते की डोर को

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