बच्चे की सबसे पहली गुरु उसकी माँ होती है

July 07, 2019
   माँ एक छोटा सा  शब्द है परन्तु इसका विस्तार 7  समुन्दर से भी ज्यादा है आज किसी को भी जन्म देने वाली माँ की स्थिति पर विचार किया जाये तो औसत जो निकलेगा उससे यही प्रतीत होगा की  जन्म देने वाली  माँ की स्थिति बहुत ही दयनीय है जिस तरह से आज अखबारों में खबरें छपती है जानकर बड़ा दुख होता है की जहां एक माँ अपने चार चार बच्चों  का पालन पोषण करने में कोई कसर नहीं छोड़ती है आज के युग में चार चार  बच्चे मिलकर भी एक माँ को पालने में असहज महसूस करते है  जो हम सबके लिए ही बड़ दुःख का विषय होना चाहिए  इस लेख के माध्यम से में यही बात आप लोगो तक पहुंचना चाहती हु की माँ, माँ ही होती है आप सिर्फ अपनी अपनी माताओ का ख्याल कर उनके चेहरे को प्रसन्नता से खिला दे तो मेरे इस आर्टिकल लिखने की सार्थकता सिद्द हो जाएगी हर   माँ की वो   मनोकामना पूर्ण हो जाएगी   जो  रिश्तो  का एहसास अपने बुढ़ापे में बच्चो से अपने अधिकार के साथ  करना  चाहती है |
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 बच्चे की सबसे पहली गुरु उसकी माँ होती है 

     जिस तरह बच्चे की सबसे पहली पाठशाला उसका घर होता है उसी तरह बच्चे की सबसे पहली गुरु उसकी माँ होती है | बच्चे में सबसे ज्यादा गुण  उसकी माँ के होते है यह एक प्राकृतिक सत्य है | कारण यह है की बच्चा नौ महीने तक माँ की कोख में पलता है उसकी एक एक हरकत का असर उस पर होता है | जब वह जन्म लेता है और कोख से बाहर आकर   आँखें खोलता है तो भले ही वह कह नहीं पाता लेकिन जैसे जैसे वह बड़ा होता है माँ के द्वारा जिस तरह उसकी परवरिश की जाती है वह उसे महसूस अवश्य करता है | यही वजह है की बच्चा सबसे  ज्यादा विश्वास अपनी माँ का करता है | सबसे ज्यादा बात अपनी  माँ की मानता है |
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  पिता  की गलत बात पर  बच्चे माँ  के पक्ष में  क्यों   खड़े नज़र आतें हैं 

 बचपन में जब तक उसकी सोच परिपक्व    नहीं हो जाती तब तक  वह माँ को ही सब कुछ मानता है | जिस तरह बच्चे  विद्यालय  में एक शिक्षक की बात को सबसे ज्यादा महत्व  देतें हैं उसी प्रकार घर में बच्चे माँ की बात को सबसे ज्यादा तवज्जु  देतें हैं | सही मानते हैं |  पिता से  भी बच्चे बहुत कुछ सीखते है  हैं लेकिन अक्सर माँ के पक्ष में ही खड़े देखे जा सकतें हैं |  इसका यह अर्थ नहीं है की बच्चे पिता की बात नहीं मानते या पिता को तवज्जु नहीं देतें हैं  |  चूंकि बच्चे के जन्म के समय  माँ  को जो पीड़ा सहनी पड़ती है उस पीडा को प्राकृतिक रूप से बच्चा हमेशा महसूस करता है और यही वजह है की एक बार पिता की सही बात पर भी माँ के विरुद्द जाने के लिए बच्चे साहस नहीं जुटा पाते हैं |  और पिता  की गलत बात पर  बच्चे माँ  के पक्ष में   खड़े नज़र आतें हैं | 
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 क्या है पिताओं के लिए गर्व की बात है

यह प्राकृतिक सच है जिससे पिताओं को चिंतित होने की आवश्यकता नहीं है बल्कि यह क्या है पिताओं के लिए गर्व की बात है की वे ऐसे बच्चों के पिता हैं जो इस दुनिया के सबसे बड़े गुरु की शरण में हैं |  और वह गुरु है  माँ ऐसे बच्चे अपने भविष्य को कभी दावं पर नहीं लगने देंगे |  लेकिन इस बात से माताओं की जिम्मेदारी और अधिक बढ़ जाती है इस बात का  एहसास दुनिया की हर माँ को बार - बार होता रहता है  |  क्योंकि यदि माताओं से   अपने बच्चों को घर गृहस्थी की सही और गलत का ज्ञान देने में, रिश्ते नातों का एहसास कराने में, जीवनयापन,  जीने की कला और कुशलता समझाने में  चूक हो गई तो   बच्चों का भविष्य दांव पर लग जाएगा | सारी  उम्र इसी बोझ   के तले दब कर  जीवन बिताने वाली माँ  का   स्थान जीवन में कोई नहीं ले सकता |  माँ की ममता और माँ की डाँट दोनों ही बच्चों के लिये आवश्यक है | बचपन से लेकर बुढ़ापे तक जो ज्ञान माँ बच्चों को बाँटती वह ज्ञान कोई गुरु नहीं दे सकता इस  दृष्टि से माँ गुरु से भी बढ़कर होती  है |


 इसलिए  माँ का स्थान गुरु से भी बड़ा होता है

जिस तरह ईश्वर तक पहुंचने का रास्ता गुरु ने बताया है इस वजह से गुरु को बड़ा बताया गया है और गुरु तक बच्चे को माँ ही पहुँचाती है   इस दृष्टि से भी  माँ का स्थान गुरु से भी बड़ा होता है | माँ के इस  कर्ज से  हम शायद जीवन भर भी कर्ज मुक्त नहीं हो सकते सिर्फ माँ को मुस्कुराहट देकर उसको सम्मान देकर  बुढ़ापे में  उसकी बच्चों की तरह देखभाल करके इसे हम कुछ कम ज़रूर कर सकतें हैं |


 माँ ही धरती माँ ही अम्बर 
माँ  से सारा जहाँ है 
माँ की पूजा जो नहीं करता 
वह कैसा इंसान है 

by jeevanamrat


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