जीवन की किताब का पेज भले ही फाड़ दे पूरी किताब मत फाड़िये

July 16, 2019
 हर व्यक्ति का जीवन खुली किताब की तरह होता है कोई इसे पढ़ पाता  है कोई नहीं | क्या आप ने अपने जीवन की  किताब को कभी  पड़ा है ?  यदि हाँ  दो देखिये आपने कितनी बार एक शब्द गलत होने पर पूरा पेज ही काट डाला ? कितनी बार एक पेज गलत होने पर पूरी  की  पूरी किताब ही  फाड् डाली  ?   जो कुछ भी अच्छा बुरा सही गलत हम जीवन में करते हैं वह इस किताब में छपता जाता है |
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  यदि इस किताब के किसी पेज पर  कोई शब्द गलत लिख दिया गया है तो उस  शब्द को काटकर नया लिख दिया जाता है किताब का पेज नहीं फाडा  जाता यदि पेज गलत लिख दिया गया है तो पेज को फाड़ कर नया पेज  लिखा जा सकता है गलत पेज के लिए पूरी किताब को नहीं फाड़ा  जाता |
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 यानि हमारे जीवन की किसी एक गलती के लिए सारा जीवन दॉँव  पर  नहीं लगाया जाता   परन्तु  हम जीवन भर यही गलती करते  हैं  जीवन की इस किताब का  एक शब्द गलत होने पर हम पूरा पेज ही फाड़ डालते हैं |  एक पेज  गलत होने पर पूरी  किताब ही फाड़ डालते  हैं | यानि जीवन ही दॉँव  पर लगा  देते है |   चाहे वो हमसे गलत हुआ हो या दूसरों से दुसरो की भी हम पूरी की पूरी किताब ही फाड़  डालते है |
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  आज हमारे रिश्तों में दरारे आने का मुख्य कारण  यही है |  रिश्तों में मिठास बनाये रखने के लिए रिश्तों को निभाने के लिए  | क्योकि जीवन का  एक पेज लिखने में  बहुत पसीना  बहाना  पड़ता है परिश्रम  करना पड़ता है संघर्ष करना पड़ता है इस संघर्ष और परिश्रम का कोई मूल्य नहीं होता परन्तु इस किताब के अनुभव बड़े कीमती होते है  ना  जाने कब   काम आ जाये
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