जीवन के रिश्तो में मिठास बनाये रखने का यह है असली मंत्र

July 01, 2019
   नमस्कार दोस्तों ,
 क्या आप भी  जीवन में तनाव , रिश्तो में बिखराव  परिवारों में मन मुटाव को   लेकर चिंतित है   | मन मुटाव चाहे  जीवन साथी से हो बाप- बेटो में हो भाई- भाई में हो पड़ोसी -पड़ोसी में हो किसी के  लिए भी लाभकारी  नहीं होता |  इनकी मुख्य वजह क्या है ? मन मुटाव को क्यों हम दूर नहीं कर पा रहे है ? इस लेख में छिपा है छोटा सा मंत्र  जो तनाव  दूर करने  रिश्तो के बिखराव को रोकने में राम बाण सिद्द होगा | एक बार इस  लेख को  पढ़े और मंत्र पर अमल  करें | यह लेख  रिश्तो में मिठास पैदा करेगा  |

 जीवन के रिश्तो में मिठास बनाये रखने का यह है असली  मंत्र

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कैसे लोग चढ़ते है सफलता की सीढ़ियाँ 
 आज हम इतने हठधर्मी  हो चुके है की अपने आप को छोटा बनाने के लिए कोई तैयार ही नहीं है |  हर कोई अपने आप को बुद्धिमानी में बड़ा साबित करने की कोशिश  कर रहा है |  यदि वास्तव में बड़ा बनना चाहते है तो अपनी सोच को बड़ा बनाये  | सोच को बड़ा बनाने पर न उम्र का पता चलेगा न पद और न  कद का  | मैं  ही क्यों करू ? मैं ही क्यों अपनी गलती स्वीकारू ? मेरी ही ठेकेदारी है क्या ? में ही कब तक दूसरो का  बोझ ढ़ोऊ  ? ये  मेरा काम है क्या  ?इस तरह के नकारात्मक वाक्य बड़े से बड़े व्यक्ति और बुद्धिजीवी को भी छोटा बना  देते है |  | चाहे घर हो या दफ्तर कई  काम ऐसे होते है जिन्हे हम कर सकते है लेकिन सिर्फ इसलिए नहीं करते की में ही कब तक करू सामने वाला तो करता ही नहीं है |  बात बिलकुल सही है एक ही व्यक्ति पर जिम्मेदारी डालने पर एक ही व्यक्ति को बार- बार और ज्यादा काम करने के लिए बाध्य करने पर इस तरह के सवाल उठना लाजमी है  | परन्तु जो लोग इन नकारात्मक बातो को सकारात्मक रूप में बदल देते है सफलता की सीढ़ियाँ  ऐसे ही लोग चढ़  पाते है |

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कैसे लोग कहलाते है बलि का बकरा
  बाकि तो सीढ़ियों तक पहुंच कर सिर्फ अपनी हसरत पूरी करने के लिए उन्हें छू भर लेते है | सफलता की सीढ़ियां चढ़ना उनके लिए सम्भव नहीं हो पाता है | कारण और वजह सीधी है साधारण विवादों को खत्म करने के लिए कई  बार उम्मीदे और अपेक्षाएं  ऐसे लोगो से की जाती है जो सकारात्मक दृष्टिकोण रखते है | सामूहिक हित  सोचते है |  ऐसे लोगो को बलि का बकरा भी कहा  जाता है |   कई  बार बकरा शब्द सुन कर ऐसे लोगो का मन दुखी भी होता है, मलाल भी होता है |  परन्तु उनकी यह क़ुरबानी व्यर्थ कभी नहीं जाती है |  क्योकि यह जीवन बहुत लम्बा  है |  किसको, किससे , कब काम पड़ जाये कुछ कहा नहीं जा सकता |  परिवार हो या रिश्ते नाते एक दूसरे की मदद के बिना इस जीवन यात्रा को पूरा करना मुश्किल ही नहीं असम्भव है | 
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 क्या है  बलि के बकरे का  असली अर्थ 
  और बलि के बकरे का  असली अर्थ  तो उस समय ही  समझ आता है जब बलि के बकरे की क़ुरबानी से ही हमारी कोई मुराद पूरी हुई हो  | और तब उस बकरे को भी अपने आप पर फक्र होता है और बकरा समझने वाले को शर्मिंदगी |  ऐसे बकरे उस  समय लोगो की निगाह में बड़े बन जाते है  |  छोटी- छोटी ये कुर्बानिया ही इंसानियत कहलाती है |  जिनकी जरूरत हर रिश्तो में होती है |  आज लोगो के जीवन में जो तनाव है, आपसी रिश्तो में जो मन मुटाव है, परिवारों में जो बिखराव है वो छोटी - छोटी कुर्बानिया नहीं दे पाने की वजह से ही है  | इसलिए रिश्तो को बनाये रखने के लिए बलि का बकरा बनने में भी गुरेज नहीं करे | 
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