खुशियाँ परिवार को प्राकृतिक एनर्जी देती है जीवन का भी विटामिन होती है

June 29, 2019
ख़ुशी परिवार को प्राकृतिक एनर्जी देती  है |  खुशियाँ जहाँ परिवार कि सुख शांति बनये रखने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है वहीँ  शारीरिक क्रियाओं  को भी प्रभावित करती है  |  जो  व्यक्ति खुश रहना जानते है उनके चेहरे पर प्राकृतिक सौंदर्य होता है  |  दिल की बीमारियों से निजात पाने का सबसे सस्ता साधन और सबसे सस्ती दवा खुश रहना ही है |  परिवार का खुशनुमा माहौल अनेको समस्याओं  में विटामिन का काम करता है | खुश रहने से न सिर्फ हमारा स्वास्थ्य सही रहता है बल्कि आपसी रिश्ते भी मजबूत होते है |  खुश रहने वाले व्यक्ति रिश्तों  में समन्वय बना कर रिश्तो को जीवित रखते है |   परिवार में उपजी रोजमर्रा की परेशानियों के हल निकालने और निर्णय लेने में दक्षता  हासिल करने के लिए खुश  रहना बहुत ही जरूरी है | खुशियाँ  जीवन का  विटामिन होती है 
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 यही वजह है की खुश मिजाज व्यक्ति को हर जगह तवज्जो दी जाती है |   मान सम्मान दिया जाता है |     क्योंकि  उनके पास समस्याओं  के समाधान खोजने और निर्णय लेने के अनेको विकल्प होते है |  कुंठा, नफ़रत,  हिंसा  ,द्वेषता जो आज के युग के सबसे बड़े अवगुण है  इनसे दूर रहने में खुश मिजाजी के योगदान को  नकारा नहीं  जा   सकता  |  परिवार के लोग यदि खुश मिजाज हो तो  ऐसे परिवार बिरले परिवार कहलाते है |  क्योंकि  जीवन का असली आनंद  परिवार उठा पाते है |  जिन परिवारों में लोग खुशमिजाज नहीं होते है वहाँ  छोटी छोटी बातो में मन मुटाव रिश्तो में दूरिया बना देता है |  और यही दुरिया  परिवार की खुशियों में ग्रहण लगा देती है  | जो  आर्थिक , मानसिक और शारीरिक समस्याओं  के जन्म का कारण बनती है  |  फिर परिवार का हर इंसान तनाव ग्रस्त जीवन जीने पर मजबूर हो जाता है  |  जिसे समझ पाना बहुत ही मुश्किल होता है | 
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 इस छोटी सी नादानी  की वजह से कई  हँसते खेलते परिवार तबाही का शिकार हो जाते है |   लेकिन अपनी जिद की वजह से इस छोटे  से मंत्र को समझने की कोशिश तक नहीं कर पाते  है |  एक दूसरे के प्रति कुंठा और द्वेषता पालकर  घर की हँसी  खुशी  सुख शांति खो बैठते है |  वह यह भी नहीं समझ पाते है    के धन दोलत और संम्पन्नता पाने का  सबसे बड़ा साधन खुश और प्रसन्न रहना है  | जो सिर्फ अपने विवेक से कमाया जा सकता है  | सबसे बड़ी बात यह हमारे चारो और बिखरा पड़ा है  | आवश्यकता है  इसे लूटने की जिसे लूटने के लिए न कोई कानून रोकता है न किसी आदर्श और सिध्दांत के टूटने का खतरा है  |  बस आवश्यकता है अपने मन को जाग्रत करने की आवश्यकता है कुंठा, नफरत, द्वेषता की दीवारों को तोड़कर  रस्ते बनाने की |  ये दीवारे ही मन को जाग्रत होने से रोके रखती है | 
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 यही वजह है की लोग न खुद आनंद को लूट पते है न दुसरो को लूटने देते है  | तनाव और दुखो के पहाड़ खड़े करके रस्ते ब्लाक किये जा सकते है जिन को चढ़ कर पार करने में में पसीने छूट जाते है |  वहीं खुशियो के पहाड़  खड़े  भी हो तो उनको चढ़ कर पार करना भी आसान लगता है इसलिए यदि जीवन का असली मजा लेना चाहते  हो तो  खु शियो के पहाड़ बनाओ दुखो के नहीं | 
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