उपहारों के लेंन देंन में बरते सावधानी प्राकृतिक उपहारों का भी रखे ख्याल

May 04, 2019
उपहार लेना और देना एक सामाजिक परिपाटी है, रिवाज है| जीवन में कई अवसर ऐसे आते हैं जब हमें पारंपरिक तौर पर उपहारों का आदान - प्रदान करना पड़ता है | उपहार हमारी भावनाओं का प्रतीक होते हैं| और भावनाओं को कीमत में व्यक्त नहीं किया जा सकता | वैसे तो उपहार देने व लेने के लिए कई अवसर जीवन में आते हैं | शादी - विवाह, जन्मदिन, प्रेम की निशानी के तौर पर यह एक सामाजिक परंपरा हैं | लेकिन आज के इस युग में उपहार फैशन के तौर पर भी दिए जाते हैं | कहीं- कहीं अपना काम निकलवाने के लिए भी भेंट स्वरूप उपहार दिये जाते है | पारंपरिक और सामाजिक रीति रिवाजों के रूप में उपहारों का लिया व दिया जाना एक सीमा तक जायज है | लेकिन अपना काम निकलवाने के लिए अथवा अपने शोक मौज के लिए दिए गए उपहार लेना और देना नुकसानदायक हो सकते हैं | ऐसे उपहारों के लेन-देन में सावधानी बरतना आवश्यक है |
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से उपहारों के लेन - देन से आपका मान-सम्मान व प्रतिष्ठा प्रभावित हो सकती है| महंगे उपहारों के लेन - देन में कानूनी प्रक्रिया को ध्यान में रखना नितांत आवश्यक है | लालच में आकर आप ऐसी कोई भेंट स्वीकार न करें जिससे आप मुसीबत को निमंत्रण दें | बच्चों के लिए ये आवश्यक है कि वे अपने माता-पिता की अनुमति या उनकी जानकारी के बगैर उपहारों का आदान - प्रदान न करें | माता-पिता की भी यह खास जिम्मेदारी बनती है कि यदि उनके बच्चों को किसी प्रकार का तोहफा भेंट या उपहार मिला है तो उसके बारे में पूर्ण जानकारी रखें क्यों दिया गया है ? किस अवसर पर दिया गया है ? किसके द्वारा दिया गया है ? कितनी कीमत का है ? आदि बातों की जानकारी माता - पिता को होना आवश्यक है | उपहारों का यह खेल कहीं आप के परिवार की सुख शांति नहीं छीन ले?
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यह तो रही हमारे पारंपरिक उपहारों की बात | कुछ उपहार हमें प्रकृति के द्वारा भी दिए गए हैं जिसका मूल्य हमारे लिए शायद कुछ नहीं है | लेकिन आवश्यकता पड़ने पर यह उपहार बहुमूल्य हो जाते हैं | यह उपहार हमें फ्री में मिले हैं | लेकिन अब हम इनकी कीमत चुकाना शुरू कर चुके हैं | और यदि आगे हम इनके प्रति सजग और जागरुक नहीं रहे तो अभी तो हमें यह मामूली कीमत पर भी उपलब्ध हो रहे हैं आगे जाकर इनकी कीमत इतनी हो जाएगी कि आम आदमी उस कीमत को चुका नहीं सकेगा | पैसा शायद हम इसलिए कमा रहे हैं कि आने वाले समय में प्राकृतिक चीजें हमें नसीब नहीं होगी | और इस कमाए हुए पैसे का उपयोग हम इन चीजों को महंगे दामों में खरीद कर, कर सकेंगे | पैसा कमाने और बचाने के लिए हम सारी भाग दौड़ कर रहे हैं | लेकिन जो चीज हमारे पास फ्री की है उसे बचाने के लिए या उसे शुद्ध रखने के लिए हमारे पास समय नहीं है |
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क्या अपने बच्चों को महंगी पढ़ाई हम इसलिये करवा रहे हैं कि आगे जाकर इंजीनियर, वैज्ञानिक बनकर इन प्रकृति प्रद्दत चीजों का कृत्रिम आविष्कार करें ? क्या हम अपने बच्चों को डॉक्टर इसलिए बना रहें हैं की हम हवा पानी और पर्यावरण को अशुद्ध करके साँस तक नहीं ले सकें और हमारे बच्चे डॉक्टर बनके हमारा इलाज करे ? कितनी अच्छी सोच हमारी बन गई है | आज जो हम कर रहें हैं उससे ऐसे दिन आ चुके हैं | पर्यावरण जहरीला हो चुका है | सोचकर देखें कि क्या हम प्रकृति के उपहारों को कृत्रिम बनाकर अपने बच्चों के भविष्य को संवार पाएंगें ? वर्तमान को जहरीला करके हम उन्हें कैसा भविष्य देंगें ? अभी भी वक्त है यदि आप अपने परिवार को प्रसन्न देखना चाहते हैं यदि आप परिवार को स्वस्थ रखना चाहते हैं, यदि आप अपने बच्चों का भविष्य बनाना चाहते हैं तो वर्तमान में पर्यावरण को जहरीला होने से बचाएं पर्यावरण को शुद्ध और स्वच्छ रखने में सहयोग करें | प्राकृतिक पर्यावरण के साथ साथ सामाजिक वातावरण को भी सुधारना और शुद्ध रखना निहायत जरूरी है | आने वाले समय का सबसे बड़ा उपहार शायद यही होगा |

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