बच्चे हमारी अनमोल धरोहर इन्हे सहेज कर रखना अति आवश्यक है

January 07, 2019
 हर व्यक्ति चाहता है उसका बच्चा पढाई में सबसे अव्वल रहे इसके लिए वह हर संभव प्रयास करता है . अनाप शनाप पैसा खर्च करता है।  महंगे स्कूल में पढ़ने की कोशिश करता है लेकिन वह यह जानने की कोशिश नहीं करता की आखिर क्या वजह है की बच्चा पढाई में कमज़ोर है , क्यों मार्क्स अच्छे नहीं आ रहे हैं।  इन चीज़ों का समाधान निकलने के लिए हमे यह समझना होगा की हर बच्चे की क्षमता अलग होती है , उसकी रूचि अलग होती है, उसका स्वाभाव अलग होता है , उसके पालन पोषण और पारिवारिक स्थितियां अलग होती हैं।
https://goo.gl/images/3ULu4r



बच्चे का  अव्वल आना या मार्क्स ले आना ही सब कुछ नहीं होता ऐसा नहीं है की जो अव्वल आये है या अच्छे मार्क्स ले आये वे हर चीज  में परफेक्ट हो।  आपका बच्चा भले ही अव्वल नहीं आया हो , मार्क्स उसके किसी कारण  से कम आये हो लेकिन  दूसरे नज़रिये से देखे तो किसी न किसी मायने में आपका बच्चा और बच्चो  से आगे हो सकता है।  मसलन आपके बच्चे की संगीत में रूचि हो सकती है , खेलकूदमें रूचि हो सकती है।  सामाजिक कार्यों में रूचि हो सकती है।  रचनात्मक ,कार्यों में रूचि हो सकती है।
https://goo.gl/images/ZNVVbU


  अधिकतर माता पिता की यही इच्छा होती है की उनका बच्चा पढाई में अव्वल आये लेकिन उन्हें यह बात सिर्फ एक ही नज़रिये से नहीं सोचनी चाहिए।  माता पिता को अपना नजरिया बदलने की आवश्यकता है।  आज बच्चों के पास इतने विकल्प हैं की वे पढाई के अलावा भी बहुत से क्षेत्रों में अव्वल आ सकते हैं।  नाम कमा सकते है।  माता पिता का अव्वल आने का सपना किसी भी क्षेत्र मे पूरा कर सकते हैं बशर्त है माता पिता उनकी रूचि का ख्याल रखे।  उनके स्वभाव के मुताबिक उन्हें अवसर प्रदान करे बच्चों की मानसिकता को समझे , उनकी रूचि पर निगाह रखे बच्चों को किसी एक क्षेत्र के लिए प्रतिबंधित न करे।  उन पर दबाव नहीं बनाये।  हौसला अफ़ज़ाई करे।  सही गलत में फर्क समझाए।
https://goo.gl/images/oxXmm8

 मानवीय दृष्टिकोण खुद भी अपनाये , बच्चों को भी अपनाने के लिए  प्रेरित करे।  सामाजिक और पारिवारिक ज़िम्मेदारियों का खुद भी एहसास करे ताकि बड़े होकर बच्चे भी उसका अनुसरण करे।  मान सम्मान और प्रतिष्ठा का ध्यान खुद भी रखे , नशे की लत से दूर रहे।  परिवार में तालमेल बनाये रखे।  पारिवारिक विवादों को  समझदारी और सभ्यता  से निपटाएं।  ये सभी बातें बच्चों की पढाई में रूचि बनने और नहीं बनने में सहायक होती है।  यदि हम इन बातों का ध्यान रखे , नैतिक रूप से हम अपनी ज़िम्मेदारी समझे तो बच्चे चाहे पढाई में अव्वल आये या न आये उनके मार्क्स और बच्चो की  तुलना में कम या ज़्यादा आ जाये लेकिन जब घर में सुख शांति, नैतिकता और बच्चो से नज़दीकी रहेगी तो भविष्य में कभी न कभी, किसी न किसी क्षेत्र मेंआपके बच्चे के  अव्वल आने की उम्मीद ज़रूर रहेगी।  और ऐसे बच्चे अपने परिवार की ज़िम्मेदारियों को उठाकर परिवार की प्रतिष्ठा को बढ़ाकर उन लोगों से अव्वल हो सकते हैं  जो इस समाज में आ रही नैतिक मूल्यों की गिरावट की वजह हो सकते हैं। 
https://goo.gl/images/So2RBC

 उन लोगों से अव्वल हो सकते है जो सामाजिक व्यवस्थाओं को बिगाड़ने में अव्वल हैं . स्त्रियों की इज़्ज़त नहीं करते हैं , बूढ़े माँ  बाप की देखभाल नहीं कर सकते हैं।  पढ़ लिखकर अव्वल आकर  बच्चे यदि समाज को नई दिशा देते हैं , परिवार को संभालकर चलते हैं  तो हर माता पिता के लिए गर्व की और ख़ुशी की बात यही होती है लेकिन यदि इसके विपरीत पढाई लिखाई  में अव्वल नहीं आ पाते हैं तो हताश और निराश होने की आवश्यकता नहीं है , दुनिया में ऐसे बहुत से काम हैं जिन्हे करके बच्चे इनके जीवन को शेप देना  हमारी जिम्मेदारी है  नाम कमा सकते हैं,पैसा कमा सकते है और अपने आप को  अव्वल नम्बर पर खड़ा कर   सकते हैं।आज कई बच्चे पढ़ाई के दबाव को सह नहीं पा रहे है और तनाव में रहकर अवसाद का शिकार हो रहे है बच्चे हमारी अनमोल धरोहर है लेकिन

No comments:

यदि आपको हमारा लेख पसन्द आया हो तो like करें और अपने सुझाव लिखें और अनर्गल comment न करें।
यदि आप सामाजिक विषयों पर कोई लेख चाहते हैं तो हमें जरुर बतायें।

'; (function() { var dsq = document.createElement('script'); dsq.type = 'text/javascript'; dsq.async = true; dsq.src = '//' + disqus_shortname + '.disqus.com/embed.js'; (document.getElementsByTagName('head')[0] || document.getElementsByTagName('body')[0]).appendChild(dsq); })();
Powered by Blogger.