क्या हम सही मायने में आधुनिकता को समझ पा रहे है ?

January 03, 2019
आज हम आधुनिकता का सही अर्थ नहीं समझ पा रहे हैं  |  मात्र हम फैशन और शोक को आधुनिकता  समझ रहे हैं अपने आप को फैशन और स्टाइलिश पाश्चात्य तौर तरीके में ढालने को  हम आधुनिकता समझ रहे हैं |  और इन्ही तरीकों से हम लोगों के आधुनिक होने और  न होने का अंदाजा लगा रहे हैं |
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  जबकि फैशनेबल होना न होना पाश्चात्य संस्कृति  को अपनाना न अपनाना हमारा  शौक हो सकता है हमारी सभ्यता का प्रतिक नहीं हो सकता |  सभ्यता  फ़ैशन  और स्टाइल के द्वारा भी झलक सकती है और  बिना फैशन किये हुए भी |  फैशन और स्टाइल के माध्यम से हम अपने आप को सुंदर दिखाने की कोशिश करते हैं और  अक्सर लोग इसे ही  बिना सोचे समझे आधुनिकता  मान रहे है |  जबकि सुंदरता प्राकृतिक होती है व्यक्ति की सुंदरता उसकी स्टाइल मात्र से या पहनावे के  फैशन  से नहीं झलकती बल्कि उसके प्राकृतिक रंग रूप से उसके प्राकृतिक हाव भाव से उसके प्राकृतिक स्वाभाव से झलकती है  |
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  फैशन और स्टाइल की सुंदरता मात्र दिखावा होती है |  जो दूसरो को तब तक ही प्रभावित कर सकती है जब तक आप उसे चोले के रूप में पहन कर रखेंगे |  लेकिन प्रकृति द्वारा दी गयी सुंदरता सदैव एक जैसी दिखती है  सदैव प्रभावित  करती है |  फैशन कर लेना और पढ़ लिख कर अपने  ज्ञान का  रौब झाड़ना कभी भी आधुनिक  नहीं हो सकता  |  आधुनिकता का सही अर्थ है समय के अनुसार अपने विचारों तथा सोच में परिस्थितियों के अनुरूप परिवर्तन लाना जो सामूहिक हित में   हो  |
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  लेकिन आज जिस आधुनिकता को हम आत्मसात कर रहे है वो सामाजिक हित में तो क्या दूर- दूर तक हमारे खुद के हित में भी नहीं है |  जरा सोच कर देखें इस अंधी आधुनिकता में हम सच झूठ का पता लगाने में असमर्थ है |  असली नकली की पहचान कर पाना मुश्किल है |  बीमारियां भी फैशनेबल हो चुकी है रोज नए - नए रंगो में उपलब्ध है |  रोटी कपड़ा और मकान जीवन के ये तीन निशान अब कितने आधुनिक हो चुके है अंदाजा भी नहीं   लगाया जा सकता  |
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 रही बात  चिकित्सा , शिक्षा चार पहिया वाहन , मोबाईल को इनमें शामिल करें  तो आधुनिक जीवन के निशानों को तीन से   बढ़ाकर सात करना लाजमी होगा |  क्योंकि ये सातों आधुनिक जीवन की मूलभूत आवश्यकताये बन   चुकी है |  बिना इनके जीवन जीना सम्भव नहीं है वो भी इनके सदुपयोग से दुरपयोग से नहीं  यदि हम आधुनिकता के सही मायने अब भी नहीं समझ पाए तो हमारी मूलभूत आवश्यकताये रोटी, कपड़ा , मकान   बिजली, पानी, शिक्षा, चिकित्सा   की जगह  मोबाईल टावर,  हवाई जहाज और  फ्लाई ओवर हो जाएंगे  | 

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