आसमान छूने की ललक पहुँचा सकती है पाताल में

January 15, 2019
हर व्यक्ति  आसमान छूना चाहता है आसमान छूने की इस ललक में  कई लोग  पाताल  में पहुँच जातें हैं ऊंचा उठना उड़ान भरने की इच्छा रखना बुरा नहीं है लेकिन यदि हम ऊपर उठने की चाह  में नीचे गिर जाते हैं तो हमे वापस उठना भी सीखना चाहिए असफल वो नहीं होता जो गिर जाता है असफल वो होता है जो गिरने के बाद उठने से इंकार कर देता है यदि आसमान को नहीं छू सके उसके रहस्यों को नहीं जान सके तो पातल  के रहस्यों को भी जाना जा सकता है |
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उसकी गहराइयों को भी  नापा जा सकता है रहस्य तो हर जगह मौजूद है कहने का अर्थ यह है की यदि हम किसी कारण वश लक्ष्य प्राप्ति में असफल रहते हैं तो इसका अर्थ यह नही है की हममे कोई योग्यता ही नहीं है एक या दो बार की असफलता किसी भी व्यक्ति का सम्पूर्ण आंकलन करने के लिए पर्याप्त नहीं है क्योंकि सफलता भी बिना असफलता के प्राप्त नहीं की जा सकती|
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 जिस सत्य  की खोज में मनुष्य अपना सारा जीवन गुजर देता है उस सत्य को वो जीवन भर में भी प्राप्त नहीं कर पाता है कारण  सिर्फ असफलता का डर  है जो असफल होने के डर से सच्चाई का ज्ञान होने से रोके हुए है असल में सच्चाई का ज्ञान करने के लिए कई बार गलतियां करनी पड़ती है और उन गलतियों से सीख लेकर उनमे सुधार करके सफलता की और कदम बढ़ाया जाता है और सुधार करने पर ही सच्चाई सामने आती है |
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इसलिए गलती होने या असफल होने से घबराये नहीं बल्कि  असफलता के कारणों   को समझें उनमे सुधार करने का प्रयास करें सत्य की खोज करने का सबसे  आसान तरीका यही है क्योंकि हम सिर्फ कही सुनी बातों पे विश्वास नहीं कर पाते हैं जब तक हम पर नहीं बीतती तब तक हम  सच्चाई स्वीकार नहीं कर पाते हैं  जैसे ही हम पर बीतती है हमे सही  और गलत का आभास होता है यही सत्य की खोज है सत्य की खोज के लिए असफलता के डर को मन से निकाले नकारात्मक विचारों को सकारातमक बनाने का हर संभव प्रयास करें तब कहीं जाकर सत्य की खोज का मार्ग प्रशस्त होगा | आसमान छूने की ललक पहुँचा सकती है पाताल में 

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