गांधी एक व्यक्ति नहीं अपितु एक सोच है, एक सिद्धांत है, एक जीवन है

October 02, 2018
गांधी एक व्यक्ति नहीं अपितु एक सोच है, एक सिद्धांत है, एक  जीवन है |  जिस व्यक्ति ने माहत्मा गाँधी की एक भी  सोच  को समझ  लिया एक भी विचार को अपना लिया स्वीकार लिया उसे जीवन  के लिए एक लक्ष्य मिल सकता है  | महात्मा गाँधी ने   सत्य, अहिंसा, क्षमा पर बल दिया क्षमा माँग लो या क्षमा कर दो एक बार में सच बोल दो या झूठ पर झूठ बोलते जाओ गुस्सा  क्रोध हिंसा कितनी भी कर लो अंत  में सब  कुछ खो जाने के बाद ,जोश ठंडा हो जाने के बाद, हालात समझ में आने के बाद पछतावा, गुस्सा क्रोध  और हिंसा करने का ही होता है चाहे वो हमारे द्वारा  की गई हो या दूसरों के द्वारा |
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  क्षमा करना क्षमा मांगना सच बोलना और अहिंसा में विश्वास करना बहुत  कम लोगों के बस की बात होती है |  इसलिये उन्हें स्वीकारने  वाले भी बहुत कम संख्या में होते हैं |  लेकिन जो होते हैं उन्हें इनका मूल्य पता है इनकी कमत पता है वो ये जानते हैं की इनका आकलन आर्थिक मूल्यों में नहीं किया जा सकता |  इनका आंकलन तो जीवन मूल्यों में किया जाता है |  आर्थिक  मूल्यों को पाने के लिए हम जीवन मूल्यों  का हास्  कर रहे हैं यही वजह है की आज हिंसा का तांडव चाहे वो मोब लीचिंग के रूप में हो, शोषण के रूप में हो, अत्याचार के रूप में ,  हो धार्मिक सहिष्णुता के रूप में हो ,अनैतिकता के रूप में हो,   घरेलू हिंसा के रूप में हो यह  हिंसा  किसी भी रूप में हो समज के लिए घातक ही साबित हो रही है |
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 विडंबना  यह है  कि सच बोलने की हिम्मत जुटा  पाना कठिन हो गया है |  क्षमा मँगने और क्षमा करने वालों को निर्बल समझा जाने लगा है  |  अहिंसा के पक्षधर  और अहिंसा की बात  करने  वालों को दूसरे गाल   पर थप्पड़ खाने वाला डरपोक और कायर इंसान समझा जाने लगा है |   लेकिन  इन सब के बावजूद भी   आज समाज को महात्मा गाँधी के सत्य अहिंसा के सिद्धांतों की सख्त आवश्यकता है |  अदालतें भी  सरकारों को हिंसा रोकने के उपाय करने के आदेश दे रही है |   और सरकार हिंसा की प्रवृत्ति रोकने में नाकाम हो रही है |
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 हिंसा की प्रवृत्ति रोकने  के लिए सत्य अहिंसा और क्षमा से अच्छे सिद्धांत   कोई  नहीं हो सकते  महात्मा गांधी के इन  सिद्धांतों ने 200 वर्षों से राज करने वाले  अंग्रेजो  के नाक में दम कर उन्हें  भारत छोड़ने पर मजबूर कर दिया था |  लेकिन तब  आवाम ने भी सत्य   अहिंसा के सिद्दान्तों का पालन किया  था खुल  कर समर्थन  किया था  |  आज अहिंसा की  वजह से सामाजिक ,  पारिवारिक और राष्ट्रीय एकता खतरे में है  आज साबरमति का यह संत भले ही हमारे साथ नहीं है लेकिन गाँधी जयंती के अवसर पर   उनके सिद्धांतो को अपनाकर  सामाजिक और पारिवारिक हिंसा को रोककर राष्ट्रीय एकता मजबूत की जा सकती है | झूठी शान और शौकत का दिखवा करने अहं और वहम को पालने गालियों  और गोलियों की बौछारों को बेवजह सहने से ज्यादा  अच्छा है ऐसे माहौल को बदलने के लिए दूसरे गाल पर थप्पड़ खाना | 

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