सच्चा प्यार वो है जो जिंदगी जीना सिखाये मरना और मारना नहीं

July 06, 2018
वास्तव में पति पत्नी और वो की कहानी कई लोगों की जिंदगी में भूचाल ला देती है | ऐसे संबंधो पर कई फिल्मे बनी है | पुरानी फिल्मो में अक्सर कहानी का अंत बहुत ही सुखद और प्रेरणा दायक दिखाया जाता था | प्यार उस जमाने में भी हुआ करता था लेकिन वो ऐसा जमाना था जब हक़ीक़त में प्यार दिल से हुआ करता था | तन से तन का मिलन भले ही न हो लेकिन मन से मन का मिलन , त्याग , वफ़ा और ज़मीर मोह्ब्तो की मिसालें बन जाया करती थी दोस्ती के लिए प्यार की कुर्बानी देकर दिलों को जीता जाता था | 

Third party image reference
लेकिन आज प्यार सिर्फ वासना की पूर्ति का साधन बनता जा रहा है | जिसकी परिणीति निखिल हांडा द्वारा शैलजा दिवेदी की हत्या के रूप में सामने आती है | ऐसी घटनाओ पर फिल्मे आज भी बनती है लेकिन उनका अंत पति पत्नी और वो में से किसी एक के मर्डर से होता है या किसी न किसी को आत्महत्या के लिए मजबूर होना पड़ता है | दोनों ही स्तिथि परिवार के लोगों के लिए दुखद होती है | जाने वाला अपनी जान से चला जाता है | कुछ लोग जो इस षड्यंत्र के जिम्मेदार होते है वो अपनी मौत को सलाखो के पीछे से देखते है | और परिवार के बचे हुए लोग बेमौत की जिंदगी जीने पर मजबूर हो जाते है | बच्चे जीवन भर इस हादसे से उबर नहीं पाते है |

Third party image reference
 आज अगर सच्चाई को स्वीकारा जाये तो दुनिया में ऐसे रिश्ते बहुतायत से पनप रहे है | रोजाना के समाचारो में इस तरह की घटनाओ का शुमार होना इस हक़ीक़त को बयां करता है | जिसका कारण स्वावाभिक है की आज रिश्ते मन के नहीं बल्कि तन की चाहत के रह गए है | जिसके लिए इंसान किसी भी हद से गुजरने के लिए तैयार हो जाता है| भले ही बेटा अस्पताल में भर्ती हो ? पीड़ित के परिवार का क्या होगा ? खुद के परिवार पर क्या बितेगी ?इस बात से बेखबर हो कर निखिल हांडा जैसे लोग इस तरह की घटनाओ को अंजाम दे देते है | जो किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है | 

Third party image reference
 ऐसे मामलो से बचने के लिए पति पत्नी और वो को सावधनी बरतनी ही चाहिए | परिवार वालो को भी समझदारी से काम लेना चाहिए | गलती चाहे किसी एक की हो भुगतना सभी को पड़ता है | इसलिए ऐसा कोई काम नहीं करें जिससे परिवार की सुख शांति भंग हो | परिवार को मुसीबतो का सामना करना पड़े | किसी को अपनी जान से हाथ धोना पड़े और किसी को जुर्म की सजा भुगतनी पड़े | परिवारों की सामाजिक प्रतिष्ठा दांव पर नहीं लगे | सामाजिक वैमनस्य पैदा न हो | प्यार जान लेने और जान देने का सौदा नहीं है प्यार पूजा है प्यार आराधना है सच्चा प्यार वो है जो जिंदगी जीना सीखये मरना और मारना नहीं | 

No comments:

यदि आपको हमारा लेख पसन्द आया हो तो like करें और अपने सुझाव लिखें और अनर्गल comment न करें।
यदि आप सामाजिक विषयों पर कोई लेख चाहते हैं तो हमें जरुर बतायें।

'; (function() { var dsq = document.createElement('script'); dsq.type = 'text/javascript'; dsq.async = true; dsq.src = '//' + disqus_shortname + '.disqus.com/embed.js'; (document.getElementsByTagName('head')[0] || document.getElementsByTagName('body')[0]).appendChild(dsq); })();
Powered by Blogger.