नजरिया

November 19, 2017
नींद से जागने के बाद सुबह हम अपने आप को तरो ताजा महसूस करते हैं हर व्यक्ति हर रोज कुछ नया चाहता है ताकि वह अपना नजरिये को अपने द्रष्टीकोण को तरो ताजा बना सके।
    ' Old is gold' लेकिन हर पुरानी चीज़ सोना हो इसकी कोई गारन्टी नहीं  और हर नई चीज़ सोना हो यह भी जरुरी नही। देश काल परिस्थिति के अनुसार हमें अपने आप में अपने विचारों में परिवर्तन कर अपने नजरिये को बदलना ही समाज के लिए , देश के लिए हितकारी होता है।
         क्योंकि कोई कहता है 'मुझे दो ही रोटी मिली' और कोई कहता है'मुझे दो तो मिली' यही नजरिये का फर्क है ।
       दो भूखे व्यक्तियों को दो-दो रोटी मिली है उनमें से एक कहता है मुझे दो ही रोटी मिली और दूसरा  कहता है मुझे दो तो मिली पहले व्यक्ति के नजरिये से प्रतीत होता है उसे अभी और भू्ख है उसे और मिलनी चाहिएे नही तो वह छीन भी सकता है। उसके मन में अभी और चाहत है या लालच है  नजरिया देखें। यदि उसने दो रोटी से अधिक का परिश्रम किया है और उसे दो ही रोटी मिली है तो यह उसकी चाहत है और यदि उसने परिश्रम दो रोटी से कम का किया है फिर भी चाहत अधिक की है तो यह उसका लालच है यदि यह उसकी चाहत है तो उसे इन्साफ के लिए द्वार खटखटाना चाहिएे और यदि यह उसका लालच है तो वह समाज के लिए बहुत खतरनाक व्यक्ति साबित हो सकता है।
   दूसरा व्यक्ति जो कहता है मुझे दो तो मिली है उसके नजरिये से प्रतीत होता है कि वह भूखा जरूर  है । लेकिन संतोषी है यदि उसने दो रोटी से अधिक का परिश्रम किया है और फिर भी वह अपना संतोष व्यक्त कर रहा है तो वह समाज के लिए सबसे अच्छा व्यक्ति साबित हो सकता है क्योंकि जो व्यक्ति अपना नुकसान करके भी सन्तुष्ट है वह समाज का या देश का कभी बुरा नही चाहेगा। समाज का भला चाहने के लिए अपना नजरिया बदलना होगा 
      
           संतोषी सदा सुखी 

No comments:

यदि आपको हमारा लेख पसन्द आया हो तो like करें और अपने सुझाव लिखें और अनर्गल comment न करें।
यदि आप सामाजिक विषयों पर कोई लेख चाहते हैं तो हमें जरुर बतायें।

'; (function() { var dsq = document.createElement('script'); dsq.type = 'text/javascript'; dsq.async = true; dsq.src = '//' + disqus_shortname + '.disqus.com/embed.js'; (document.getElementsByTagName('head')[0] || document.getElementsByTagName('body')[0]).appendChild(dsq); })();
Powered by Blogger.