पहचान दुश्मन और दोस्त की

November 18, 2017

दुश्मन


इंसान को अपनी बुराई कभी भी स्वयं नजर नहीं आती| जो लोग अपनी बुराइयों को समझना चाहते हैं, जानना चाहते हैं, उन्हें दूसरों की बातों को गौर से सुनना और समझना चाहिए हमारा अहम और वहम हमें हमारी बुराइयों तक नहीं पहुंचने देना चाहता है और इसी वजह से हमें सिर्फ वो लोग अच्छे लगते हैं जो हमारी तारीफ करते हैं, या हमारी बात को मन रखने के लिए जैसा का तैसा स्वीकार कर लेते हैं|
जो लोग हमारी कमियों को, हमारी बुराइयों को हमारे सामने लाते हैं उन्हें हम अपना दुश्मन समझने लगते हैं और जो लोग आप की बुराइयों को या कमियों को सामने लाकर आपका हित चाहते हैं, आपका भला चाहते हैं ऐसे लोगों से हम दूरी बनाना शुरु कर देते हैं| और इसे हम अपनी समझदारी समझते हैं| याद रखे ऐसे लोग जो आप की कमियों को आपके सामने ला रहे हैं वह आपके सबसे सच्चे हिमायती और दोस्त होते हैं| भगवान से हम हमेशा यही मांगते हैं रहते हैं कि हम में कोई बुराई नहीं हो और जब हमारी बुराई हमारे सामने आती है तो हम उसे दूर करने की जगह मन ही मन उस व्यक्ति को दोष देने लगते हैं जो उसे हमारे सामने लाता है दुनिया में कोई भी व्यक्ति चाहे कितना ही भला इंसान हो, कितना ही ज्ञानी हो, कितना ही बड़ा संत हो, कितना ही आदर्शवादी हो, कितना ही बड़ा सिद्धांतवादी हो, कितनी ही बड़ी सफलता हासिल कर चुका हो, बिना गलतियों और अपनी कमियों को सुधारे वह इस मुकाम पर नहीं पहुंचा हैं | हम लोग डरते हैं कि हमारी कमियां, हमारी गलतियां , हमारी बुराइयां दुनिया के सामने आ गई तो न जाने क्या बवाल हो जाएगा और यही सोच कर हम उन्हें सामने आने से रोकने के लिए अपना पूरा प्रयास करते हैं हम उन लोगों को अपना दोस्त समझते हैं जो इन कमियों और बुराइयों को छुपाने में हमारी मदद करता है|
यही हम सबसे बड़ी भूल करते हैं हम जीवन भर इन गलतियों और कमियों का वज़न हमारे मन पर ले कर ढोते रहते हैं और इस वजह को ढोते - ढोते हम थक जाते हैं कुछ परंपरागत बेड़ियाँ हम पहले से ही बांधे रखते हैं सर पर वजन और पैरों में बेड़ियाँ बांधकर हम कितना दौड़ सकते हैं सोचें हम ना खुद जीवन जी पातें हैं ना दूसरों को जीने देते हैं और मरने से पहले ही हम अपने आपको और परिवार को मार देते हैं| जिंदगी को यदि हंसी खुशी से पूरा जीना चाहते हैं तो अपनी कमियों और बुराइयों को सामने आने देें उन्हें पहचानें कहीं वाकई इन कमियों और बुराइयों की वजह से दूसरों को कोई परेशानी तो नहीं हो रही हैऔर यदि हो रही हे तो उन्हें दूर करने की कोशिश करें मन पर बोझ लेकर जीवन को बोझिल नहीं बनाएें |

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