जीवन में माँ का महत्व

June 12, 2017

               

     मां ने बेटे  को स्कूल में भर्ती किया पढ़ाया लिखाया लायक बनाया बेटे ने भी माँ के नाम पत्र लिखकर कैसे अपना फर्ज पूरा किया? अपनी पढ़ाई लिखाई और सभ्यता का कैसा परिचय दिया? पढ़िए 
मेरी प्यारी मां,  
                  प्रणाम,
                                मुझे पता है मां, तुम मुझे पहली बार स्कूल ले गई थी पीटते हुए, और फिर मैंने तुम्हारी बात मान ली थी। और आज तुम्हारी वजह से मैं अच्छे मुकाम पर हूं। अब तुम भी मेरी बात मान लो जन्नत नसीब होगी जन्नत। मैं तुझे वहां राजी खुशी अपनी कार से छोड़ कर आऊंगा ।लोग बड़े  निर्दयी होते हैं मां लेकिन मैं इतना निर्दयी नहीं हूं। कैसे कैसे बेटे होते हैं आजकल के जनम देने वाली माँ के साथ मारपीट तक कर देते हैं ? कितनी बुरी बात है? परंतु तुम्हें तो पता है मैं ऐसा बेटा नहीं हूँ माँ नहीं करूंगा।  तुम्हे तो पता है मुझे यह सब पसंद नहीं है। तुम्हें तो अपने बेटे पर गर्व होना चाहिए|  कल ही मैंने अखबार में पढ़ा था एक बेटे ने पत्नी की शिकायत पर अपनी मां को भूखा प्यासा कमरे में 3 दिन तक कैद रखा। कैसे - कैसे लोग हैं इस दुनिया में? लोग क्या, बेटे हैं बेटे लेकिन तेरा बेटा ऐसा नहीं है मां।
तुम्हारी बहू अखबार की खबर पढ़कर बड़ी दुखी हो रही थी। कह रही थी अपनी मां के लिए जल्दी कोई इंतजाम कर दो हम तो यह सब कर भी नहीं पाएंगे। इसलिए मैंने सब कुछ सोच विचार कर तुम्हारा दाखिला ओल्ड एज होम में करवा दिया है माँ । 'अपना घर' वहां सभी लोग अपने होते हैं पराया कोई नहीं होता। मां तुम ही तो कहा करती थी 'तेरी खुशी में ही मेरी खुशी है' और यह भी तुम ही ने सिखाया है " हर हाल में खुश रहना चाहिए "। मां तुम्हारे दाखिले से हमारा सारा परिवार खुश है। तुम्हारा पोता बड़ा खुश है उसे पढ़ने के लिए तुम्हारा वाला कमरा मिल जाएगा तुम्हारी वजह से पढ़ नहीं पता था बेचारा तुम्हारी ही नौकरी किया करता था | अब कुछ पढ़ तो लेगा|  बहुत ख्याल रखता है बेचारा तुम्हारा पूछ रहा था पापा, दादी का आशीर्वाद कैसे मिलेगा मुझे? मैंने कह दिया तू अपनी पढ़ाई पर ध्यान दें। यह तो पुश्तैनी जायदाद है बुजुर्गों का आशीर्वाद तो तन मन धन से हमारे साथ होता है। ठीक कहा ना मां मैने, अच्छा शेष कुशल हैं आशा ही नहीं बल्कि पूर्ण विश्वास है कि तुम्हे हमारे फैसले से निहायत खुशी हुई होगी।  ये क्या  मां? तुम रो रही हो? मुझे पता है यह आंसू खुशी के आंसू है जो अपने बेटे की खुशी में शामिल होने के लिए छलके हैं। न जाने कितनी बार तुम इस तरह खुशी के आंसू रोती आई हो मां अब मैं भी खुशी से रो दूंगा मां इसलिए पत्र समाप्त करता हूं तुम अपना सामान पैक कर लेना।
                                      तुम्हारा बेटा
         
              मां ही धरती मां ही अम्बर।
                 मां से सारा जहान है।
             मां की पूजा जो नही करता।
                    वो कैसा इंसान है?

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