jeevan me samajhdari ka mahatv in hindi

May 29, 2017

                       समझदारी

जीवन में पग-पग पर समझदारी की आवश्यकता पड़ती है।  लेकिन आज के युग में हम आर्थिक  नफे नुकसान को ही समझदारी समझते हैं। बिजनेस में या किसी वस्तु का क्रय - विक्रय में आर्थिक नफे -  नुकसान की समझदारी रखना तो जायज है। लेकिन कई बातें जीवन में ऐसी होती है, जिनका आकलन हम मूल्य में नहीं कर सकते वहां हमें समझदारी जीवन मूल्यों में दिखानी पड़ेगी। कुछ लोग पढ़े-लिखे  होने को समझदारी समझते हैं, सर्फ पढ़ा-लिखा होना समझदार होने का प्रमाण नहीं है। एक कम पढ़ा लिखा व्यक्ति भी अपने निर्णय विचारों, और अनुभवों के माध्यम से अपनी समझदारी साबित कर सकता है। हां यह अलग बात है एक पढ़ा-लिखा व्यक्ति यदि चाहे तो वह उस काम को और अच्छी तरह से कर सकता है जिस काम को एक कम पढ़ा लिखा या अनपढ़ व्यक्ति  करता है क्योंकि उसके पास भाषा और तकनीकी शिक्षा का अतिरिक्त अनुभव होता है परंतु व्यक्ति के अनुभव के आधार पर बनन कम पढ़े लिखे व्यक्ति की समझदारी पर शक नहीं कर सकते कई बार पढ़े लिखे व्यक्तियों को शर्मिंदगी महसूस करनी पड़ जाती है। हम उनसे पढ़ाई लिखाई के आधार पर समझदारी की अपेक्षा करते हैं कई लोगों को यह कहते हुए सुना जा सकता है 'कि इतने पढ़े लिखे हो कर तुम इतनी भी समझदारी नहीं है' हम यह नहीं समझ पाते कि पढ़ा-लिखा होना और समझदार होने में फर्क है एक पढ़ा-लिखा व्यक्ति कई बार संकोचवश चाह कर भी आम लोगों की तरह खुलकर अपनी जिंदगी नहीं जी सकता उसे ऐसा महसूस होता है कहीं कोई उससे कुछ कह नहीं दे बहुत सी समझदारियां  तो वह सिर्फ अपनी किताबों के नीचे दबा देते हैं कई लोगों को अपनी पढ़ाई लिखाई का अहम हो जाता है वह अपने आगे किसी को कुछ समझते ही नहीं है बुजुर्गों की बातों को ऐसे नौजवान पुराने ख्यालो के बता कर उनका मजाक बना देते हैं। लेकिन जब पारिवारिक समस्याओं के समाधान पर बात अटक जाती है तो बुजुर्गों की सूझबूझ और समझदारी के आगे उनकी गर्दन झुक जाती है सिर्फ पढ़ लिखकर किताबी ज्ञान अर्जित कर लेना ही समझदारी नहीं है। बल्कि किताबी ज्ञान के साथ व्यवहारिक ज्ञान भी जरूरी है। और व्यवहारिक ज्ञान सिर्फ किताबों से नहीं आता बल्कि देश काल परिस्थितियों के अनुभवों से व्यवहारिकता हासिल की जा सकती है। यह व्यवहारिकता हमा आत्मा की आवाज होती है व्यवहारिकता हमारी आंखों की दृष्टि होती है हमारी नेक नियती होती है हमारे निर्णय लेने की क्षमता होती है यदि किताबी ज्ञान के साथ इन बातों का तालमेल बिठा लिया जाए तो समझदारी काबिले-तारीफ हो जाती है और जीवन अमृत बन जाता है।

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